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भराड़ीसैंण में बदरी गाय के संरक्षण के लिए बनेगा रिसर्च सेंटर, 30 करोड़ की परियोजना को मिली गति

यह प्रस्तावित केंद्र उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर के पास विकसित किया जाएगा। इस रिसर्च सेंटर का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाने वाली स्थानीय नस्ल बदरी गाय के संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देना है। बदरी गाय को पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालन का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है और यह स्थानीय किसानों की आजीविका से भी गहराई से जुड़ी हुई है।

प्रस्तावित रिसर्च सेंटर को एक इंटीग्रेटेड पशुपालन पार्क के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां बदरी गाय की नस्ल पर शोध के साथ-साथ पशुपालकों और किसानों को आधुनिक पशुपालन तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके माध्यम से किसानों को बेहतर प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य, पोषण और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने से संबंधित नई तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके अलावा केंद्र में फिशरीज, भेड़ और बकरी पालन से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। इससे पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों को आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार बदरी गाय न केवल दूध उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी नस्ल पहाड़ी जलवायु और कठिन परिस्थितियों के अनुकूल भी मानी जाती है। ऐसे में इस नस्ल के संरक्षण और संवर्धन के लिए वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। प्रस्तावित रिसर्च सेंटर इस दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

इस परियोजना के शुरू होने से क्षेत्र में पशुपालन और कृषि से जुड़े नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही लोगों में बदरी गाय के महत्व और उसके संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने में भी यह केंद्र अहम भूमिका निभा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक पशुपालन को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए उसे नई दिशा देने का काम करेगी और आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक साबित हो सकती है।

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