आयुर्वेद फार्मासिस्ट बनने का सपना अब 42 वर्ष तक होगा साकार

आयुर्वेद फार्मासिस्ट बनने का सपना अब 42 वर्ष तक होगा साकार

उत्तराखंड सरकार ने आयुर्वेद के क्षेत्र में एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाते हुए आयुर्वेद फार्मासिस्ट कोर्स में प्रवेश की अधिकतम आयु सीमा 25 वर्ष से बढ़ाकर 42 वर्ष कर दी है। इस निर्णय से लंबे समय से इस क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे हजारों अभ्यर्थियों को नई उम्मीद मिली है।

अब तक कम आयु सीमा के कारण बड़ी संख्या में ऐसे इच्छुक उम्मीदवार इस कोर्स में प्रवेश नहीं ले पाते थे, जो किसी कारणवश समय पर आवेदन नहीं कर सके या जीवन के बाद के चरण में आयुर्वेद क्षेत्र से जुड़ना चाहते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वे भी अब इस अवसर का लाभ उठा सकेंगे।

राज्य सरकार के अनुसार, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। बीते कुछ वर्षों में आयुर्वेदिक उपचार और दवाओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके चलते प्रशिक्षित फार्मासिस्टों की आवश्यकता भी तेजी से महसूस की जा रही है।

इस संबंध में प्रस्ताव भारतीय चिकित्सा परिषद के रजिस्ट्रार द्वारा शासन को भेजा गया था, जिसे मंजूरी दे दी गई है। सरकार का मानना है कि यह निर्णय न केवल युवाओं, बल्कि अन्य आयु वर्ग के लोगों को भी रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि आयु सीमा में यह बढ़ोतरी आयुर्वेदिक शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगी। इससे राज्य के आयुर्वेदिक कॉलेजों में प्रवेश की संख्या बढ़ने की संभावना है और भविष्य में अधिक प्रशिक्षित पेशेवर इस क्षेत्र में उपलब्ध होंगे।

सरकार जल्द ही इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकती है, जिससे प्रवेश प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं को स्पष्ट किया जाएगा।

कुल मिलाकर, यह फैसला आयुर्वेद के विकास की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य क्षेत्र और रोजगार दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

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