शिक्षकों पर दोहरी मार: जनगणना ड्यूटी और लंबी छुट्टियों के बीच कैसे बचेगी पढ़ाई की रफ्तार?

शिक्षकों पर दोहरी मार: जनगणना ड्यूटी और लंबी छुट्टियों के बीच कैसे बचेगी पढ़ाई की रफ्तार?

देहरादून में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों एक बड़ी चुनौती का सामना कर रही है। एक ओर जहां शिक्षक हाल ही में ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं, वहीं अब उन्हें अगले एक महीने तक जनगणना कार्य में लगाया गया है। इसके तुरंत बाद ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू हो जाएगा, जो करीब एक महीने तक चलेगा। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर छात्रों की पढ़ाई सुचारु रूप से कैसे चल पाएगी।

 

जिले के हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में तैनात लगभग 1500 सहायक अध्यापक और एलटी प्रवक्ताओं में से 990 की ड्यूटी जनगणना में लगाई गई है। वहीं, प्राइमरी स्कूलों में कार्यरत 2672 शिक्षकों और कर्मचारियों में से 1328 इस कार्य में व्यस्त रहेंगे। इसके अलावा 297 शिक्षक पहले से ही बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस स्थिति में स्कूलों में शिक्षण कार्य का प्रभावित होना लगभग तय माना जा रहा है।

शिक्षकों का कहना है कि लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगने से पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। जनगणना कार्य पूरा होने तक कक्षाओं का संचालन प्रभावित रहेगा, और उसके बाद ग्रीष्मकालीन अवकाश के कारण पढ़ाई में और लंबा अंतराल आ जाएगा। इससे छात्रों की शैक्षणिक प्रगति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र रावत ने मांग की है कि शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए, ताकि पढ़ाई बाधित न हो। वहीं, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए जनगणना के नोडल अधिकारी को पत्र भेजा गया है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस चुनौती का समाधान कैसे निकालता है, ताकि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो।

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