नई दिल्ली। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से पांच महत्वपूर्ण संकल्प लेने का आग्रह किया है। उत्तराखंड की पवित्र धरती पर शुरू हुई इस आध्यात्मिक यात्रा को लेकर उन्होंने श्रद्धालुओं के नाम एक विशेष पत्र लिखते हुए स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सेवा भावना और अनुशासन पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि चारधाम यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक विरासत का भव्य उत्सव है। उन्होंने बताया कि 19 अप्रैल को गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ यात्रा का शुभारंभ हो चुका है, जबकि केदारनाथ मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर के द्वार भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय की गोद में बसे ये चारों धाम सदियों से आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने श्रद्धालुओं से जो पांच संकल्प लेने की अपील की है, उनमें सबसे पहले तीर्थस्थलों की स्वच्छता बनाए रखना शामिल है। उन्होंने विशेष रूप से सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने और यात्रा को पूरी तरह स्वच्छ रखने का आह्वान किया। दूसरा संकल्प पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है, जिसमें हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को समझते हुए प्रकृति के संरक्षण में योगदान देना शामिल है।
तीसरे संकल्प के रूप में उन्होंने सेवा, सहयोग और एकता की भावना को अपनाने पर जोर दिया। चौथा संकल्प ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने का है, जिसके तहत उन्होंने यात्रियों से आग्रह किया कि वे अपने यात्रा बजट का कम से कम 5 प्रतिशत स्थानीय उत्पादों पर खर्च करें, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। पांचवां संकल्प अनुशासन और सुरक्षा से जुड़ा है, जिसमें यात्रा के नियमों और यातायात निर्देशों का पालन करना शामिल है।
प्रधानमंत्री ने यात्रियों को एक अनोखा सुझाव देते हुए ‘डिजिटल उपवास’ अपनाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण को पूरी तरह महसूस करें। इससे न केवल मानसिक शांति मिलेगी, बल्कि यात्रा का अनुभव भी अधिक गहरा और संतोषजनक होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि चारधाम यात्रा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने का माध्यम है, क्योंकि यहां देश के विभिन्न राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग एकत्रित होते हैं। इससे राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा मिलता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में हुए विकास कार्यों ने इस यात्रा को अधिक सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बना दिया है। बेहतर सड़कें, व्यवस्थाएं और सुविधाएं श्रद्धालुओं के अनुभव को और भी दिव्य बना रही हैं।
अंत में उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स और युवाओं से अपील की कि वे उत्तराखंड की स्थानीय परंपराओं, कहानियों और संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाएं। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इन पांच संकल्पों के साथ की गई चारधाम यात्रा श्रद्धालुओं के जीवन में नई ऊर्जा, प्रेरणा और आध्यात्मिक जागरूकता का संचार करेगी। उन्होंने सभी यात्रियों को सुरक्षित, सफल और दिव्य यात्रा के लिए शुभकामनाएं भी दीं।







