उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में इन दिनों मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। जहां एक ओर लगातार हो रही बारिश ने भीषण गर्मी से लोगों को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खासकर गैरसैंण और आसपास के क्षेत्रों में बेमौसम बारिश और ओलों ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
पिछले तीन दिनों से जारी गरज-चमक के साथ बारिश ने खेतों में खड़ी और कटी गेहूं की फसल को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है। नंदासैंण, आदिबदरी, दिवालीखाल, सैंण और रोहिड़ा जैसे इलाकों में गुरुवार दोपहर बाद तेज बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई। इसका सीधा असर गेहूं के साथ-साथ फल, फूल और सब्जियों की फसलों पर पड़ा है। किसानों का कहना है कि कटाई के लिए तैयार फसलें अब खराब होने लगी हैं, जिससे उनकी सालभर की मेहनत पर संकट मंडरा रहा है।
वहीं पौड़ी में शाम के समय करीब 5 एमएम बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट आई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंडक बढ़ गई है, जबकि निचले इलाकों में भी मौसम सुहावना हो गया। बारिश के चलते जंगलों में लगी आग पर भी काफी हद तक काबू पाया गया है और पेयजल स्रोतों के सूखने की समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
नई टिहरी में झमाझम बारिश के बाद तापमान में करीब 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। दिन में जहां तापमान 25.6 डिग्री था, वहीं बारिश के बाद यह घटकर 19 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विभाग ने क्षेत्र के लिए अलर्ट भी जारी किया था, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई।
रुद्रप्रयाग जिले में भी दोपहर बाद तेज बारिश हुई, जिससे मौसम सुहावना हो गया। तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, ऊखीमठ और केदारनाथ जैसे क्षेत्रों में बारिश से धुंध और जंगलों की आग से राहत मिली है।
हालांकि, पुरोला और रंवाई घाटी के इलाकों में ओलावृष्टि ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। खलाड़ी, चपटाड़ी और करड़ा जैसे गांवों में सेब, नाशपाती, आड़ू, प्लम और खुबानी जैसी बागवानी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। साथ ही टमाटर की नर्सरी और सब्जियों की पौध भी पूरी तरह नष्ट हो गई है।
इसी बीच ऋषिकेश में तेज आंधी और बारिश के चलते पेड़ बिजली लाइनों पर गिर गया, जिससे पूरे शहर में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। शाम के समय अचानक अंधेरा छा गया और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कुल मिलाकर, गढ़वाल में मौसम का यह बदला रूप आम लोगों के लिए राहत लेकर आया है, लेकिन किसानों के लिए यह किसी आपदा से कम नहीं है। अब किसानों की नजरें सरकारी राहत और मुआवजे पर टिकी हैं, ताकि उनके नुकसान की भरपाई हो सके।







