देहरादून के कुआंवाला क्षेत्र में प्रस्तावित ‘राठ भवन’ अब केवल एक कल्पना नहीं, बल्कि जल्द ही हकीकत बनने जा रहा है। राठ जन विकास समिति के प्रयासों से यह बहुप्रतीक्षित परियोजना शीघ्र ही निर्माण चरण में प्रवेश करेगी। यह भवन न केवल एक भव्य संरचना के रूप में उभरेगा, बल्कि राठ क्षेत्र के लोगों की एकता, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता का प्रतीक भी बनेगा।
30 अप्रैल 2026 को आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस परियोजना को वर्षों से देखे जा रहे सामूहिक सपने की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि ‘राठ भवन’ का निर्माण आगामी एक वर्ष के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, जिससे यह प्रवासी राठ समाज के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक समन्वय का एक प्रमुख केंद्र बन सकेगा। उनका यह आश्वासन क्षेत्रवासियों के लिए नई उम्मीद और उत्साह लेकर आया।
डॉ. रावत ने राठ जन विकास समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन थलीसैंण और पाबो क्षेत्र से जुड़े सैकड़ों परिवारों को एक मंच पर लाने का सराहनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भवन निर्माण में सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा, जिससे यह परियोजना समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण हो सके।
इस अवसर पर क्षेत्रीय विकास को लेकर भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। मंत्री ने बताया कि श्रीनगर में लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से धारी देवी मंदिर तक एक बायपास मार्ग का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त पौड़ी से पाबो और त्रिपालीसैंण के बीच सुरंग परियोजनाओं पर भी कार्य किया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से देहरादून से पाबो की दूरी और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे आवागमन अधिक सुगम और सुविधाजनक बनेगा।
पर्यटन के क्षेत्र में भी नई संभावनाओं की ओर संकेत करते हुए उन्होंने बिनसर मंदिर, पैठाणी राहु मंदिर और बुँखल कालिंका मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में तेजी से पर्यटन विकास की संभावनाएं उभर रही हैं। धारी देवी से चौथान होते हुए बिनसर मंदिर तक एक पर्यटन सर्किट विकसित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
राठ जन विकास समिति के अध्यक्ष मेहरबान सिंह गुसाईं ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ‘राठ भवन’ केवल एक इमारत नहीं होगा, बल्कि यह क्षेत्र की लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों का जीवंत केंद्र बनेगा। महासचिव पुरुषोत्तम ममगाईं ने भी इसे 25 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद साकार हो रहा एक महत्वपूर्ण सपना बताया।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी सभी का मन मोह लिया। तारकेश्वरी भण्डारी, सरिता भट्ट और रेखा रावत द्वारा प्रस्तुत लोकगीत और नृत्य ने राठ क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की। इन प्रस्तुतियों ने समारोह को और अधिक जीवंत और यादगार बना दिया।
इसके साथ ही आयोजन में सामाजिक सेवा के कई पहलुओं को भी शामिल किया गया। निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, नेत्र परीक्षण शिविर और रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और सेवा भावना का परिचय दिया। यह पहल समाज के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी का प्रतीक बनी।
समग्र रूप से यह आयोजन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और जनसेवा के संदेश के साथ संपन्न हुआ। ‘राठ भवन’ का निर्माण न केवल एक भौतिक ढांचा खड़ा करेगा, बल्कि यह राठ क्षेत्र के प्रवासी परिवारों को एक साझा पहचान और मजबूत सामाजिक आधार प्रदान करेगा। आने वाले समय में यह भवन निश्चित रूप से एक प्रेरणादायी केंद्र के रूप में स्थापित होगा, जो पीढ़ियों तक संस्कृति और एकता की विरासत को संजोकर रखेगा।







