प्रसिद्ध गीतकार प्रसून जोशी बने प्रसार भारती के नए चेयरमैन

प्रसिद्ध गीतकार प्रसून जोशी बने प्रसार भारती के नए चेयरमैन

प्रसिद्ध गीतकार प्रसून जोशी को प्रसार भारती का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है। गौरतलब है कि प्रसून जोशी भारतीय सिनेमा जगत का एक जाना-माना चेहरा हैं।

सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैश्नव ने कहा कि प्रसार भारती बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में प्रसून जोशी की नियुक्ति पर मेरी हार्दिक बधाई। प्रसून जोशी बेहद क्रिएटिव हैं, जिनकी विज्ञापन, साहित्य, कला और सिनेमा में पूरी दुनिया में तारीफ हुई है। इसके बावजूद उनका दिल लगातार भारत के लिए धड़कता रहता है।

अश्विनी वैश्नव ने कहा कि प्रसून जोशी के शब्द देश की मिट्टी की खुशबू रखते हैं। उनकी दृष्टि भारतीय संस्कृति के सुनहरे अतीत का दर्शन कराती है। मंत्री ने आगे लिखा कि प्रसून जोशी के नेतृत्व में, प्रसार भारती नई ऊर्जा, गहरी उद्देश्य और एक ताजा रचनात्मक आवाज़ खोजेगा। उनके लिए एक यादगार और सार्थक कार्यकाल के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

प्रसून जोशी को वर्ष 2025 में महाकवि नीरज सम्मान से सम्मानित किया गया है, जो भारतीय साहित्य और सिनेमा में उनके योगदान का सम्मान है। यह सम्मान उनकी कवि, गीतकार की पहचान को मजबूत करता है, और दिखाता है कि वे सिर्फ विज्ञापन की दुनिया में ही नहीं, बल्कि साहित्य और कला में भी सक्रिय हैं। अल्मोड़ा में जन्मे और रचनात्मकता के पर्याय प्रसून जोशी की शख्सियत को यदि एक शब्द में बयां करना हो, तो ‘हरफनमौला’ की संज्ञा भी शायद अधूरी ही प्रतीत होगी। वे न केवल एक बेहतरीन और स्थापित कवि हैं, बल्कि एक प्रसिद्ध लेखक, संवेदनशील गीतकार, दिग्गज ऐड-गुरु, पटकथा लेखक और इन सबसे बढ़कर एक अद्भुत वक्ता भी हैं।

अल्मोड़ा की माटी से उपजे उनके शब्दों में आज भी हिमालय जैसी अडिगता और लोक गीतों की मिठास जीवित है, जो आधुनिकता के दौर में भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों की ओर लौटने की प्रेरणा देती है। प्रसून अत्यंत संयत स्वभाव के ‘शब्दों के जादूगर’ हैं। उनकी कलम से निकली रचनात्मकता ने सदैव समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया है।

बदलते भारत के लेखक और कवि हैं प्रसून

इस नियुक्ति से पहले, प्रसून जोशी अगस्त 2017 से भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने भारतीय सिनेमा की वैचारिक गरिमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच एक आदर्श संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी उपलब्धियों का सम्मान करते हुए कुमाऊं विश्वविद्यालय ने उन्हें ‘डी.लिट’ की मानद उपाधि से भी विभूषित किया है।

प्रसून उस बदलते हुए भारत के लेखक हैं, जिसको उनके गीत और कविताएं एक नई राह दिखाने की सामर्थ्य रखते हैं। उनकी रचनाओं में आक्रोश, उम्मीद, उत्साह और बनते-बिगड़ते सपनों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। कविताएं सीधे पाठकों के मन को स्पर्श करती हैं। बेटियों के जन्म के प्रति समाज के नकारात्मक रवैये पर तीखी टिप्पणी करते हुए, उनका निश्छल कवि-हृदय ऐसी जड़ता और नकारात्मक सोच पर गहरा कटाक्ष करता है: “शर्म आ रही है ना, उस समाज को जिसने उसके जन्म पर खुल के जश्न नहीं मनाया। शर्म आ रही है ना, उस पिता को उसके होने पर जिसने एक दीया कम जलाया…।”

उपलब्धियां

  • 2025 में प्रसून जोशी को वर्ष 2025 में महाकवि नीरज सम्मान से सम्मानित किया गया।
  • 52 वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रसून जोशी को ‘इंडियन फिल्म पर्सनैलिटी ऑफ द ईयर’ सम्मान प्रदान किया गया।
  • 2015 में भारत सरकार ने कला, साहित्य एवं विज्ञापन के क्षेत्र में शानदार योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से विभूषित किया।
  • 17 साल की उम्र में ही प्रसून की पहली किताब ‘मैं और वो’ प्रकाशित हुई।
  • गीतकार के तौर पर उन्हें पहला ब्रेक बॉलीवुड में राजकुमार संतोषी की फिल्म ‘लज्जा’ से मिला।
  • पटकथा लेखक के रूप में प्रसून जोशी ने बहुचर्चित फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ की स्क्रिप्ट लिखी।
  • गीतकार के रूप में फिल्म ‘तारे जमीन पर’ के गाने लिखे, उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
  • 2013 में ‘चटगांव’ के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • 03 बार सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार जीत चुके प्रसून जोशी खूब चर्चित और लोकप्रिय हैं।

अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत को गौरवान्वित किया

मंच पर अपने अद्वितीय सम्प्रेषण, संयोजन और संवाद कौशल के लिए विख्यात प्रसून जोशी ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर भी भारत को गौरवान्वित किया है। 18 अप्रैल, 2018 को लंदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक कार्यक्रम ‘भारत की बात सबके साथ’ का सफल संचालन किया। यह कार्यक्रम दो घंटे 20 मिनट तक चला। प्रसून के गीतों और विज्ञापनों में पहाड़, प्रकृति और गांव की माटी का विशेष स्थान रहा है। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से न केवल पहाड़ के जीवन का चित्रण किया है, बल्कि यहां के प्राकृतिक परिवेश को भी बखूबी संजोया है।

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