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बसें खड़ी, यात्री परेशान: ड्राइवरों की कमी से दून में रोडवेज सेवाएं चरमराईं

जानकारी के अनुसार, रोडवेज के पर्वतीय डिपो की करीब 24 बसें पिछले तीन महीनों से वर्कशॉप में खड़ी हैं। इन बसों को सड़कों पर उतारने के लिए ड्राइवरों की कमी सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। वर्तमान में डिपो में 57 ड्राइवरों की कमी बताई जा रही है, जिसके चलते बस संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
इस समस्या को और बढ़ा दिया है चारधाम यात्रा ने। डिपो की लगभग 20 बसें चारधाम यात्रा में लगाई गई हैं, जिससे स्थानीय रूटों पर बसों की संख्या और कम हो गई है। परिणामस्वरूप, टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी, चमोली और रुद्रप्रयाग जैसे पर्वतीय जिलों के लिए चलने वाली कई दैनिक बस सेवाएं या तो रद्द हो रही हैं या फिर अनियमित हो गई हैं।
देहरादून-मसूरी बस अड्डा पर सुबह से ही यात्रियों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। लोग घंटों बसों का इंतजार करते हैं, लेकिन जब बस नहीं आती, तो उन्हें मजबूर होकर टैक्सी या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उनका खर्च भी बढ़ रहा है।
पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह समस्या और गंभीर है, क्योंकि वहां पहले से ही परिवहन के सीमित साधन उपलब्ध हैं। बस सेवाओं के प्रभावित होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पर्वतीय डिपो के सहायक महाप्रबंधक राकेश कुमार के अनुसार, विभाग जल्द ही इस समस्या का समाधान करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि डिपो को नए ड्राइवर मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और उम्मीद है कि अगले सप्ताह तक ड्राइवरों की कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी।
हालांकि, जब तक यह कमी पूरी नहीं होती, तब तक यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। यह स्थिति परिवहन विभाग की योजना और संसाधन प्रबंधन पर भी सवाल खड़े करती है। जरूरत है कि सरकार और संबंधित विभाग समय रहते ठोस कदम उठाएं, ताकि आम जनता को बेहतर और सुचारू परिवहन सुविधा मिल सके।

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Hill Mail

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