पंतनगर: समग्र विकास के अवसरों की भूमि – कुलपति

पंतनगर: समग्र विकास के अवसरों की भूमि – कुलपति

गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के कुलपति प्रोफेसर शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने गांधी हॉल सभागार में स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए पंतनगर को ‘अवसरों की भूमि’ बताया। उन्होंने छात्रों को अपनी चार वर्षीय स्नातक यात्रा का अधिकतम लाभ उठाने और इसे केवल पढ़ाई तक सीमित न रखकर समग्र विकास के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन में कुलपति ने कहा कि पंतनगर केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, कौशल वृद्धि और व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने का सशक्त मंच है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे इन चार वर्षों को पूरी तरह जिएं, नई संभावनाओं का अन्वेषण करें और अपनी सीमाओं को चुनौती दें। उन्होंने जोर देकर कहा कि जितना अधिक प्रयास किया जाएगा, उतनी ही अधिक सफलता प्राप्त होगी।

उन्होंने एक मजबूत प्रोफाइल बनाने के महत्व को रेखांकित करते हुए छात्रों को अपना स्वयं का सीखने का एजेंडा तैयार करने और निरंतर प्रेरित रहने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि विविध और जीवंत परिसर का वातावरण नई संस्कृतियों को समझने, नए विचार विकसित करने और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल अवसर प्रदान करता है।

कुलपति ने छात्रावास जीवन और सहकर्मी समूह (पीयर ग्रुप) के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक सकारात्मक और सक्रिय समूह व्यक्ति की सोच और विकास को दिशा देता है। सहयोगात्मक वातावरण में विचारों का आदान-प्रदान छात्रों के बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

अंतर्विषयक अनुभव को बढ़ावा देते हुए उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने-अपने महाविद्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि विश्वविद्यालय के अन्य विभागों, प्रयोगशालाओं और अनुसंधान केंद्रों का भी लाभ उठाएं। उन्होंने जिज्ञासा को नवाचार की कुंजी बताते हुए परियोजना कार्य को शैक्षणिक एवं व्यावहारिक शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

उन्होंने विशेष रूप से छात्रों को दूसरे और तीसरे वर्ष के दौरान कम से कम दो से तीन परियोजनाओं में भाग लेने की सलाह दी। उनके अनुसार, परियोजना-आधारित शिक्षा से न केवल बायोडाटा मजबूत होता है, बल्कि व्यावहारिक कौशल विकसित होते हैं और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं।

समग्र विकास पर बल देते हुए कुलपति ने छात्रों से खेलकूद, शारीरिक फिटनेस, सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां व्यक्तित्व को निखारती हैं और उच्च शिक्षा, विशेषकर अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में प्रवेश के लिए भी महत्वपूर्ण होती हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय में स्टेडियम, फिटनेस सेंटर, सांस्कृतिक समितियां और सुसज्जित छात्रावास जैसी उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिन्हें लगातार और बेहतर बनाया जा रहा है।

अंत में उन्होंने कहा कि पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय स्वयं में एक बड़ा अवसर है और इन चार वर्षों का सदुपयोग एक सफल भविष्य की मजबूत नींव रख सकता है। कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, छात्र कल्याण अधिष्ठाता तथा विभिन्न छात्रावासों के वार्डन एवं सहायक वार्डन भी उपस्थित रहे।

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