उत्तराखंड में आगामी मानसून सीजन को देखते हुए शासन-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मानसून आने से पहले प्रदेश की सभी सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाए, ताकि आम जनता को बारिश के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय रहते तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि मानसून के महीने उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होते हैं। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी विभागों को 24 घंटे और सातों दिन सक्रिय रहना होगा, ताकि किसी भी आपदा या आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में सड़कों की मरम्मत, पुलों की सुरक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। लोक निर्माण विभाग और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए कि खराब सड़कों की मरम्मत कार्य तेजी से पूरा किया जाए। खासतौर पर पहाड़ी जिलों में भूस्खलन संभावित मार्गों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है।
इसके साथ ही बिजली और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को भी दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि मानसून के दौरान अक्सर बिजली लाइन और पेयजल योजनाएं प्रभावित होती हैं, इसलिए समय रहते रखरखाव और मरम्मत कार्य पूरे किए जाएं। खाद्य आपूर्ति विभाग को गैस सिलेंडर, राशन, मिट्टी तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में लोगों को दिक्कत न हो।
बैठक में एक अहम मुद्दा सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और भ्रामक वीडियो का भी रहा। मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि आपदा के समय गलत और भ्रामक वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए हैं, ताकि अफवाह फैलाकर माहौल खराब करने वालों पर रोक लगाई जा सके।
इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में जलभराव रोकने के लिए नगर निकायों और जिलाधिकारियों को नालियों की सफाई अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए। नदी-नालों पर हुए अतिक्रमण को तत्काल हटाने के आदेश भी जारी किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य है कि मानसून के दौरान जनता को सुरक्षित और सुगम सुविधाएं मिलें तथा किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।







