नदी में उतरकर टैक्सी पकड़ने को मजबूर यात्री, बदहाल रिस्पना स्टैंड बना मुसीबत का सफर

नदी में उतरकर टैक्सी पकड़ने को मजबूर यात्री, बदहाल रिस्पना स्टैंड बना मुसीबत का सफर

देहरादून का रिस्पना पुल स्थित पहाड़ी टैक्सी स्टैंड आज अव्यवस्था, गंदगी और सुविधाओं के अभाव का प्रतीक बन चुका है। उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, श्रीनगर और कोटद्वार जैसे पर्वतीय जिलों के लिए रोजाना सैकड़ों यात्रियों का सहारा बनने वाला यह स्टैंड खुद बदहाली की मार झेल रहा है। हालत यह है कि यात्रियों और चालकों को टैक्सी पकड़ने के लिए कभी रिस्पना नदी के सूखे तल तक उतरना पड़ता है तो कभी अजबपुर फ्लाईओवर के नीचे खड़ी गाड़ियों तक पहुंचना पड़ता है।

 

नगर निगम से अधिकृत होने के बावजूद इस टैक्सी स्टैंड पर यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। हर साल निगम को लगभग साढ़े चार लाख रुपये किराया देने के बावजूद न तो यहां पीने के साफ पानी की व्यवस्था है, न बैठने के लिए टिनशेड और न ही साफ-सुथरे शौचालय। रात दो-तीन बजे से पहाड़ जाने वाले यात्री यहां पहुंचना शुरू हो जाते हैं, लेकिन महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को खुले आसमान के नीचे इंतजार करना पड़ता है।

 

रिस्पना टैक्सी स्टैंड से करीब 350 वाहन पंजीकृत हैं। इसके अलावा विभिन्न ट्रैकर एसोसिएशनों की गाड़ियां भी यहीं से संचालित होती हैं। रोजाना 70 से 80 वाहनों का संचालन होता है और लगभग 400 से 500 यात्री सफर करते हैं। लेकिन पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण अधिकांश वाहन रिस्पना नदी किनारे या अजबपुर फ्लाईओवर के नीचे खड़े किए जाते हैं। बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, जब अचानक पानी बढ़ने का खतरा बना रहता है।

 

यात्रियों का कहना है कि स्टैंड पर बुनियादी सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। पौड़ी जाने वाले यात्री सुबोध रावत बताते हैं कि यहां पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है। वहीं उत्तरकाशी के यात्री विपुल पैन्यूली का कहना है कि महिलाओं और बच्चों के बैठने के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं है। एकमात्र शौचालय भी गंदगी से भरा रहता है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

 

टैक्सी स्टैंड समिति के सचिव प्रदीप सिंह रावत ने आरोप लगाया कि नगर निगम हर साल किराए में 10 प्रतिशत की वृद्धि कर देता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं किया जाता। सफाई, स्ट्रीट लाइट और पार्किंग जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं तक नदारद हैं। समिति अपने सीमित संसाधनों से व्यवस्था संभालने की कोशिश कर रही है, लेकिन समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

 

अब इस स्टैंड पर एक नई चिंता भी मंडरा रही है। प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना के कारण टैक्सी स्टैंड की बची हुई जमीन भी प्रभावित हो सकती है। यदि ऐसा हुआ तो पहाड़ जाने वाले हजारों यात्रियों और सैकड़ों चालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

 

देवभूमि के पर्वतीय क्षेत्रों को राजधानी से जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण टैक्सी स्टैंड आज सरकारी अनदेखी का शिकार है। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के विकास के दावों के बीच आखिर पहाड़ के यात्रियों को कब तक नदी में उतरकर टैक्सी पकड़नी पड़ेगी?

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