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ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बंद पड़े मेडिकल स्टोर, देहरादून से श्रीनगर गढ़वाल तक मरीज बेहाल

देहरादून शहर में करीब 2000 और जिलेभर में लगभग 3500 मेडिकल स्टोर बंद रहने से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। दवा कारोबारियों के मुताबिक केवल दून शहर में ही एक दिन में करीब 15 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। अस्पतालों के बाहर स्थित दवा दुकानों पर सुबह से ही ताले लटके रहे, जिससे मरीजों की मुश्किलें और बढ़ गईं।

हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन के चलते कोरोनेशन, गांधी, रायपुर और प्रेमनगर अस्पतालों की ओपीडी बंद रही, जिससे कुछ हद तक भीड़ कम रही। इसके बावजूद दून अस्पताल में पहुंचे मरीजों को आवश्यक दवाएं नहीं मिल सकीं। डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाओं के लिए लोग एक दुकान से दूसरी दुकान तक भटकते नजर आए।

एमकेपी रोड स्थित जैन मेडिकोज के सामने दवा कारोबारियों ने प्रदर्शन किया। उत्तरांचल औषधि व्यवसायी महासंघ के जिलाध्यक्ष मनीष नंदा और नगर अध्यक्ष संजीव तनेजा ने कहा कि ऑनलाइन दवा कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर छोटे और मध्यम दवा कारोबारियों का व्यापार खत्म करने की कोशिश कर रही हैं। उनका कहना था कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक नहीं लगाई, तो हजारों दवा कारोबारी और उनके कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे।

दवा कारोबारियों ने ऑनलाइन बिक्री को मरीजों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बताया। महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री में जांच और निगरानी की मजबूत व्यवस्था नहीं है। इससे नकली, घटिया और नशीली दवाओं के बाजार में आने का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बिना डॉक्टर की सही सलाह और सत्यापन के दवाएं मरीजों तक पहुंच रही हैं, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।

हड़ताल का असर केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहा। विकासनगर, हरबर्टपुर, सहसपुर, मसूरी और श्रीनगर गढ़वाल में भी मेडिकल स्टोर बंद रहने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई सरकारी अस्पतालों के जन औषधि केंद्र भी बंद मिले, जिससे गरीब और दूरदराज से आए मरीजों की मुश्किलें और बढ़ गईं। लोगों ने मांग की कि भविष्य में ऐसी स्थिति में कम से कम आपातकालीन दवा सेवाएं चालू रखी जानी चाहिए।

मरीजों की पीड़ा दिनभर अस्पतालों में साफ दिखाई दी। आईटीआई सब्जी मंडी निवासी अमित ने बताया कि उनकी बहन के शरीर में पोटेशियम की कमी थी और डॉक्टर ने तुरंत दवा लेने की सलाह दी थी, लेकिन सभी मेडिकल स्टोर बंद मिलने से उन्हें बिना दवा लौटना पड़ा। हाथीबड़कला निवासी प्रवीण सिंह ने बताया कि पथरी के तेज दर्द के कारण डॉक्टर ने कई दवाएं लिखी थीं, लेकिन अस्पताल से केवल एक सिरप मिला। बाकी दवाएं बाहर से खरीदनी थीं, पर बाजार में सभी दुकानें बंद थीं।

अजबपुर कलां निवासी शिवानी ने बताया कि स्किन की कुछ दवाएं अस्पताल से मिल गईं, लेकिन बाकी दवाओं के लिए बाहर भेजा गया। जब बाजार पहुंचीं तो सभी मेडिकल स्टोर बंद मिले और अब उन्हें अगले दिन फिर अस्पताल आना पड़ेगा।

उधर, केमिस्ट एसोसिएशन के कुछ पदाधिकारियों ने कहा कि उनका विरोध केवल ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ है, बंद के पक्ष में नहीं। उनका कहना था कि जो व्यापारी स्वेच्छा से दुकान बंद रखना चाहते हैं, वही बंद रखें।

दवा कारोबारियों की इस हड़ताल ने एक बार फिर ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यापार के बीच बढ़ते टकराव को सामने ला दिया है। लेकिन इस संघर्ष के बीच सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को उठानी पड़ी, जिन्हें समय पर दवा नहीं मिल सकी।

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Hill Mail

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