टिहरी की घाटी में मौत से मुकाबला, खेतों में इमरजेंसी लैंडिंग कर टाला बड़ा हादसा, उत्तराखंड की पहाड़ियों में बुधवार सुबह एक बड़ा हवाई हादसा टल गया। बदरीनाथ से दिल्ली लौट रहे छह यात्रियों को लेकर उड़ रहा हेलीकॉप्टर अचानक तेज हवाओं और डाउनड्राफ्ट की चपेट में आ गया। कुछ पल के लिए यात्रियों की सांसें थम गईं, लेकिन पायलट अनुपमा चौधरी की सूझबूझ और साहस ने सभी की जान बचा ली। टिहरी जिले के जौनपुर ब्लॉक के सत्यों-सकलाना क्षेत्र में खेतों के बीच हेलीकॉप्टर की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कर उन्होंने एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया।
घटना बुधवार सुबह करीब 10 बजे की है। ट्रांस भारत एविएशन कंपनी का बेल-407 हेलीकॉप्टर बदरीनाथ से दिल्ली के यात्रियों को लेकर लौट रहा था। हेलीकॉप्टर जब टिहरी के चंबा-आराकोट क्षेत्र के ऊपर पहुंचा, तभी मौसम ने अचानक करवट बदल ली। घाटी में तेज हवाओं और ऊपर से नीचे की ओर बहने वाली डाउनड्राफ्ट ने हेलीकॉप्टर का संतुलन बिगाड़ना शुरू कर दिया।
पायलट अनुपमा चौधरी ने बताया कि हवा का दबाव इतना अधिक था कि हेलीकॉप्टर तेजी से नीचे की ओर खिंच रहा था। उन्होंने लगातार हेलीकॉप्टर को ऊपर उठाने की कोशिश की, लेकिन हालात लगातार चुनौतीपूर्ण होते जा रहे थे। ऐसे में उन्होंने यात्रियों को हिम्मत बंधाई और सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया।
अनुपमा ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती पहाड़ों के बीच ऐसी सुरक्षित जगह तलाशना था, जहां आबादी न हो और हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा जा सके। इसी दौरान उन्हें सत्यों-सकलाना क्षेत्र में खुले खेत दिखाई दिए। कुछ मिनट तक हवाओं से संघर्ष करने के बाद उन्होंने हेलीकॉप्टर को खेतों के बीच सुरक्षित उतार दिया।
इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान हेलीकॉप्टर का पिछला हिस्सा हाईटेंशन लाइन से टकरा गया, जिससे उसमें मामूली क्षति हुई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि हेलीकॉप्टर की मशीनरी पूरी तरह काम कर रही थी और किसी यात्री को कोई चोट नहीं आई। इसके बावजूद पायलट ने कोई जोखिम लेने के बजाय हेलीकॉप्टर को आगे उड़ाने का फैसला नहीं किया।
हेलीकॉप्टर में पायलट अनुपमा चौधरी के अलावा दिल्ली के पंजाबी बाग निवासी साहिल सूरी, राज सूरी, भूमि सूरी, पार्थ, हिमांशी पटेल और निवका सवार थे। अचानक आए इस संकट के दौरान यात्रियों में दहशत का माहौल था, लेकिन सुरक्षित लैंडिंग के बाद सभी ने राहत की सांस ली।
घटनास्थल सड़क मार्ग से करीब 500 मीटर दूर था। सूचना मिलते ही प्रशासन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। बाद में सभी यात्रियों को टैक्सी के जरिए सुरक्षित देहरादून भेजा गया। हेलीकॉप्टर की जांच और तकनीकी निरीक्षण के लिए कंपनी की मेंटेनेंस टीम भी मौके पर पहुंच गई।
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के सीईओ आशीष चौहान ने बताया कि प्रतिकूल मौसम और डाउनड्राफ्ट के कारण हेलीकॉप्टर को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। हेलीकॉप्टर के बाहरी हिस्से को मामूली नुकसान हुआ है और तकनीकी जांच की जा रही है।
पायलट अनुपमा चौधरी मूल रूप से मेरठ, उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना में 15 वर्षों तक सेवाएं दी हैं और पर्वतीय क्षेत्रों में करीब 1800 घंटे उड़ान का अनुभव रखती हैं। पिछले डेढ़ साल से वह ट्रांस भारत एविएशन कंपनी से जुड़ी हैं और बदरी-केदारनाथ घाटी में लगातार अपनी सेवाएं दे रही हैं।
अनुपमा ने कहा कि पहाड़ों में मौसम पलभर में बदल जाता है और हर उड़ान चुनौती लेकर आती है। हालांकि, वर्षों का अनुभव कठिन परिस्थितियों में सही फैसला लेने में मदद करता है। उन्होंने बताया कि बुधवार का अनुभव यात्रियों के लिए बेहद डरावना था, लेकिन उनकी प्राथमिकता सभी को सुरक्षित बाहर निकालना थी।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पहाड़ों में हवाई सेवाएं जितनी जरूरी हैं, उतनी ही जोखिम भरी भी। लेकिन ऐसे कठिन हालात में पायलट अनुपमा चौधरी जैसी बहादुर और अनुभवी पायलटों की सूझबूझ ही यात्रियों की जिंदगी की सबसे बड़ी सुरक्षा बनती है।








