वन विभाग के अनुसार, गुरुवार को गढ़वाल क्षेत्र में सबसे अधिक 23 स्थानों पर जंगलों में आग लगी, जबकि देहरादून और कुमाऊं मंडल में सात-सात स्थानों पर वनाग्नि की घटनाएं सामने आईं। अधिकांश स्थानों पर वन विभाग, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया, लेकिन तब तक बड़ी मात्रा में वन संपदा को नुकसान पहुंच चुका था।
गढ़वाल मंडल के उत्तरकाशी जिले में स्थिति चिंताजनक रही। गंगा घाटी क्षेत्र में पांच और यमुना घाटी में दो स्थानों पर जंगल आग की चपेट में आ गए। इसके अलावा टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पौड़ी जिलों में भी कई स्थानों पर जंगल धधकते रहे। आग बुझाने के लिए वन विभाग के कर्मचारी लगातार मैदान में डटे रहे और कई स्थानों पर रात तक राहत एवं बचाव कार्य जारी रहा।
चकराता वन प्रभाग में हालात सबसे अधिक गंभीर रहे। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलती गई और कई किसानों के सेब के बगीचे इसकी चपेट में आ गए। आग से प्रभावित किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। पीड़ित किसानों ने तहसील प्रशासन और उद्यान विभाग से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है।
देवघार रेंज में तीन अलग-अलग स्थानों पर लगी आग को बुझाने के लिए 50 से अधिक वनकर्मियों को लगभग 12 घंटे तक लगातार संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान करीब साढ़े सात हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की भेंट चढ़ गया, जबकि वन विभाग की तत्परता से 428 हेक्टेयर जंगल को बचा लिया गया। अधिकारियों ने इसे बड़ी सफलता बताया है, लेकिन आग की बढ़ती घटनाएं भविष्य के लिए गंभीर संकेत दे रही हैं।
कुमाऊं मंडल में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अल्मोड़ा, बागेश्वर के बिनसर क्षेत्र और चंपावत जिले में जंगलों में आग की कई घटनाएं दर्ज की गईं। वहीं चमोली जिले के गोपेश्वर क्षेत्र में कोठियालसैंण के जंगल में लगी आग ने कई पेड़ों को राख कर दिया। जंगल के समीप खड़ी एक कार भी आग की चपेट में आकर पूरी तरह जल गई।
वनाग्नि का प्रभाव केवल जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पर्यावरण, वन्यजीवों और स्थानीय जनजीवन पर भी पड़ रहा है। आग के कारण जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है, वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं और वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा है। इसके साथ ही ग्रामीणों की आजीविका, कृषि और पर्यटन गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
वनाग्नि की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन विभाग अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जंगलों में लगी आग को बुझाने में सहयोग नहीं करने या लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर केस दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
गढ़वाल के मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि) सुशांत पटनायक ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आग की बड़ी घटनाएं सामने आई हैं। नुकसान का आकलन किया जा रहा है और सभी वन प्रभागों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना और वन संपदा को बचाना है। बढ़ती गर्मी के बीच आने वाले दिनों में वनाग्नि की चुनौती और गंभीर हो सकती है, जिसके लिए प्रशासन और आम जनता दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।




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