एक शिक्षक के भरोसे चल रहा विद्यालय, तीन कक्षाओं की पढ़ाई पर संकट

एक शिक्षक के भरोसे चल रहा विद्यालय, तीन कक्षाओं की पढ़ाई पर संकट

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयासों का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कई स्थानों पर अलग तस्वीर पेश कर रही है। विकासखंड पाबौ के अंतर्गत स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पांग पिछले एक वर्ष से मात्र एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहा है। शिक्षकों की भारी कमी के कारण विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

विद्यालय में पांग, थापली और पुसोली गांवों के बच्चे शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। लेकिन पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति न होने से यहां शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। वर्तमान में एकमात्र शिक्षक को कक्षा छह, सात और आठ के विद्यार्थियों को एक साथ पढ़ाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। ऐसे में सभी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

क्षेत्र पंचायत सदस्य धर्मवीर अजयपाल सिंह ने बताया कि विद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इस शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में विद्यालय में कुल 16 छात्र-छात्राएं नामांकित थे, लेकिन पढ़ाई की कमजोर व्यवस्था और शिक्षकों के अभाव के कारण दो छात्रों ने विद्यालय छोड़कर अन्य स्कूलों में प्रवेश ले लिया। वर्तमान में विद्यालय में केवल 14 छात्र अध्ययनरत हैं। यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो और अधिक छात्र विद्यालय छोड़ सकते हैं।

विद्यालय में कार्यरत शिक्षक सतवीर सिंह नेगी ने बताया कि वे अकेले ही तीनों कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं। इसके साथ ही विभागीय कार्यों और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बोझ भी उन पर है। हाल ही में उनकी ड्यूटी भवन गणना जैसे कार्यों में भी लगाई गई, जिससे विद्यालय संचालन में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के लिए तीन अलग-अलग कक्षाओं को एक साथ पढ़ाना बेहद चुनौतीपूर्ण है।

वर्तमान में विद्यालय की कक्षा छह में पांच छात्र, कक्षा सात में तीन छात्र और कक्षा आठ में छह छात्र अध्ययनरत हैं। हालांकि छात्र संख्या अधिक नहीं है, लेकिन अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग पाठ्यक्रम और विषय होने के कारण एक शिक्षक के लिए सभी विद्यार्थियों को समान रूप से समय देना संभव नहीं हो पाता। इसका सीधा असर बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता और सीखने की क्षमता पर पड़ रहा है।

अभिभावकों का कहना है कि यदि विद्यालय में जल्द अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो उन्हें मजबूरन अपने बच्चों को दूसरे विद्यालयों में भेजना पड़ेगा। ग्रामीणों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से ही विद्यालयों की संख्या सीमित है और ऐसे में शिक्षकों की कमी बच्चों के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) पौड़ी अंशुल बिष्ट ने बताया कि जिले के जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद विद्यालय में शिक्षकों की तैनाती कर पठन-पाठन व्यवस्था को सुचारु बनाने का प्रयास किया जाएगा।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों को अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई का इंतजार है। उनका कहना है कि यदि समय रहते विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति हो जाती है तो बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी और विद्यालय में घटती छात्र संख्या को भी रोका जा सकेगा। शिक्षा के अधिकार को प्रभावी बनाने के लिए दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है।

Hill Mail
ADMINISTRATOR
PROFILE

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

विज्ञापन

[fvplayer id=”10″]

Latest Posts

Follow Us

Previous Next
Close
Test Caption
Test Description goes like this