चारधाम यात्रा के चरम पर पहुंचने के साथ ही गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित गंगोरी बैली ब्रिज की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आने लगी हैं। पुल की स्टील प्लेटों के नेट-बोल्ट ढीले पड़ने के कारण उसमें कंपन और तेज आवाजें आने लगी हैं, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों में भय का माहौल है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं और सैकड़ों वाहनों की आवाजाही झेल रहा यह पुल अब सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।
गंगोत्री धाम जाने वाले प्रमुख मार्ग पर स्थित यह बैली ब्रिज चारधाम यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यात्रा सीजन के दौरान हर दिन बड़ी संख्या में तीर्थयात्री, स्थानीय लोग और मालवाहक वाहन इस पुल से होकर गुजरते हैं। ऐसे में पुल की तकनीकी खामियां सामने आने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
रात के समय बढ़ जाती है दहशत
स्थानीय निवासियों के अनुसार पुल पर रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान तेज कंपन और धातु के टकराने जैसी आवाजें सुनाई देती हैं। पुल की स्टील प्लेटों से आने वाली इन आवाजों ने लोगों को आशंकित कर दिया है। कई लोगों का कहना है कि जब भारी ट्रक या बस पुल से गुजरते हैं तो पुल में असामान्य कंपन महसूस होता है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुल पहले भी अपनी क्षमता से अधिक भार और लगातार बढ़ते यातायात दबाव के कारण चर्चा में रहा है। अब जब इसके बोल्ट ढीले पड़ने की बात सामने आई है, तो इसकी मजबूती और सुरक्षा को लेकर सवाल उठने स्वाभाविक हैं।
स्थानीय लोगों ने उठाई मरम्मत की मांग
क्षेत्र के लोगों ने पुल की स्थिति को गंभीर बताते हुए तत्काल तकनीकी निरीक्षण और मरम्मत की मांग की है। पूर्व सभासद देवेंद्र चौहान ने कहा कि पुल की स्टील प्लेटों के नेट-बोल्ट ढीले पड़ना एक गंभीर तकनीकी समस्या है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) से तुरंत विशेषज्ञ टीम भेजकर पुल का निरीक्षण कराने और आवश्यक मरम्मत कार्य कराने की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों ने भी विभाग को पत्र भेजकर पुल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी संभावित दुर्घटना से पहले प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
चारधाम यात्रा में अहम भूमिका निभाता है पुल
गंगोरी बैली ब्रिज उत्तरकाशी और गंगोत्री धाम के बीच यातायात का महत्वपूर्ण माध्यम है। यह पुल न केवल यात्रियों की आवाजाही बल्कि आपूर्ति और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि पुल में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी बढ़ती है, तो इसका सीधा असर यात्रा व्यवस्था और स्थानीय जनजीवन पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैली ब्रिज जैसी संरचनाओं में नियमित निरीक्षण और समय-समय पर रखरखाव बेहद जरूरी होता है। बढ़ते यातायात दबाव के बीच छोटी तकनीकी खामियां भी भविष्य में बड़े जोखिम का कारण बन सकती हैं।
बीआरओ ने दिया जल्द कार्रवाई का भरोसा
मामले को गंभीरता से लेते हुए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने भी स्थिति पर संज्ञान लिया है। बीआरओ के कमांडर राजकिशोर ने बताया कि विभाग को पुल के ढीले बोल्टों और कंपन की जानकारी प्राप्त हो चुकी है। जल्द ही तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंचकर विस्तृत निरीक्षण करेगी।
उन्होंने कहा कि पुल के सभी ढीले बोल्टों को कसने के साथ आवश्यक मरम्मत कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। राजकिशोर ने स्पष्ट किया कि यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
चारधाम यात्रा के महत्वपूर्ण दौर में गंगोरी बैली ब्रिज की स्थिति ने प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सभी की नजरें बीआरओ की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि समय रहते पुल को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके और यात्रियों का सफर निर्बाध एवं सुरक्षित बना रहे।








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