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देहरादून में विरोध का उबाल: पेपर लीक, शिक्षकों की मांगें और डॉक्टरों का आंदोलन, सड़कों पर दिखा जनाक्रोश

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सोमवार को विभिन्न आंदोलनों और प्रदर्शनों का केंद्र बनी रही। एक ओर नीट पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने सचिवालय कूच कर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया, तो दूसरी ओर प्रदेशभर से आए जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर गर्जना रैली निकाली। वहीं आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने भी मांगों की अनदेखी के विरोध में आंदोलन का बिगुल फूंक दिया। दिनभर राजधानी की सड़कों पर विरोध, नारेबाजी और पुलिस के साथ टकराव का माहौल बना रहा।

सबसे बड़ा प्रदर्शन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की ओर से किया गया। नीट परीक्षा पेपर लीक और विभिन्न भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध में कार्यकर्ता कांग्रेस भवन से सचिवालय कूच के लिए निकले। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में निकाले गए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की।

सुभाष रोड पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस को वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा। पानी की तेज बौछारों के बावजूद कई प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर डटे रहे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक भी हुई। बाद में पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। हालांकि बाद में सभी को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि देश में लगातार पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा कमजोर हो रहा है और इसके लिए केंद्र सरकार जवाबदेह है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि युवाओं के हितों की रक्षा के लिए उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते।

इसी दिन प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के बैनर तले भी राजधानी में बड़ा प्रदर्शन हुआ। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षकों ने परेड ग्राउंड से सचिवालय तक गर्जना रैली निकाली। शिक्षकों की प्रमुख मांगों में टीईटी की बाध्यता समाप्त करना, पुरानी पेंशन बहाल करना, पदोन्नति, स्थानांतरण और अन्य सेवा संबंधी मुद्दों का समाधान शामिल था।

जब शिक्षक सचिवालय की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान शिक्षकों और पुलिस के बीच बहस, नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारों का प्रयोग किया। हालांकि बाद में सचिवालय प्रशासन ने शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया।

बैठक में शिक्षामंत्री की अध्यक्षता में जल्द उच्चस्तरीय वार्ता आयोजित करने का लिखित आश्वासन दिया गया। इसके बाद शिक्षक संघ ने फिलहाल आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा की, लेकिन स्पष्ट किया कि यदि वार्ता में समाधान नहीं निकला तो क्रमिक अनशन, आमरण अनशन और मुख्यमंत्री आवास घेराव जैसे कदम उठाए जाएंगे।

वहीं आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ ने भी अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रदेशभर के आयुर्वेदिक डॉक्टरों ने काली फीती बांधकर कार्य किया और सरकार के प्रति नाराजगी जताई। संघ का कहना है कि विभागीय पदों पर गैर-संवर्गीय अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति में देरी और डीएसीपी जैसी मांगों पर लंबे समय से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो 15 जून से कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा।

सोमवार का दिन यह संदेश देकर गया कि युवाओं, शिक्षकों और चिकित्सकों के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर असंतोष मौजूद है। सरकार के सामने चुनौती केवल आंदोलनों को नियंत्रित करने की नहीं, बल्कि उन समस्याओं का समाधान खोजने की भी है जिनके कारण विभिन्न वर्ग सड़कों पर उतरने को मजबूर हो रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलित संगठनों के बीच होने वाली वार्ताएं इन आंदोलनों की दिशा तय करेंगी।

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