घर-घर दस्तक, हर मतदाता तक पहुंचने की कोशिश: एसआईआर अभियान के पहले दिन बीएलओ के सामने गर्मी, पलायन और तकनीकी चुनौतियां

घर-घर दस्तक, हर मतदाता तक पहुंचने की कोशिश: एसआईआर अभियान के पहले दिन बीएलओ के सामने गर्मी, पलायन और तकनीकी चुनौतियां

उत्तराखंड में मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से सोमवार से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान की शुरुआत हो गई। अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करने, गणना प्रपत्र वितरित करने और आवश्यक जानकारियां एकत्र करने में जुट गए हैं। अभियान के पहले दिन प्रदेशभर से उत्साहजनक भागीदारी के साथ-साथ कई व्यावहारिक चुनौतियों की तस्वीर भी सामने आई।

राज्य के पर्वतीय जिलों उत्तरकाशी, टिहरी और पिथौरागढ़ में लोगों ने बीएलओ का स्वागत करते हुए प्रक्रिया में सहयोग किया। कई स्थानों पर मतदाताओं ने स्वयं आगे बढ़कर अपने दस्तावेज उपलब्ध कराए और गणना प्रपत्र भरने में रुचि दिखाई। दूसरी ओर देहरादून, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग और अन्य जिलों में बीएलओ को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। गर्मी, छुट्टियों के कारण बंद घर, तकनीकी समस्याएं और दस्तावेजों की कमी अभियान की गति को प्रभावित करती दिखाई दी।

अभियान के पहले दिन सबसे बड़ी चुनौती घरों में मतदाताओं का न मिलना रही। स्कूलों और शिक्षण संस्थानों की छुट्टियों के कारण बड़ी संख्या में परिवार पर्यटन या अन्य कारणों से बाहर गए हुए हैं। कई घरों में ताले लटके मिले, जिससे बीएलओ को बार-बार संपर्क करने की आवश्यकता पड़ रही है। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता भी हैं जो रोजगार के लिए दूसरे शहरों में रह रहे हैं, जिसके कारण सत्यापन प्रक्रिया जटिल बन रही है।

पौड़ी, चमोली और उत्तरकाशी जैसे जिलों में बीएलओ ने घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों का वितरण शुरू किया। पौड़ी में सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा विभिन्न मतदान स्थलों का निरीक्षण कर अभियान की प्रगति का जायजा लिया गया। वहीं चमोली जिले में जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी के नेतृत्व में अभियान संचालित किया गया। इस दौरान प्रसिद्ध पर्यावरणविद और पद्म विभूषण सम्मानित चंडी प्रसाद भट्ट ने भी अपना गणना प्रपत्र भरकर अभियान में भागीदारी की।

पौड़ी जिले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने अपने पैतृक गांव पहुंचकर एसआईआर प्रक्रिया में हिस्सा लिया और बीएलओ को अपना गणना प्रपत्र सौंपा। उन्होंने मतदाताओं से इस प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग करने और विशेष रूप से प्रवासी लोगों से अपने गांव की मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की अपील की। उनका कहना था कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदाता सूची में शामिल होना आवश्यक है।

अभियान के दौरान बीएलओ को तकनीकी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। कई दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी कमजोर होने के कारण ऑनलाइन डेटा अपलोड करने में कठिनाई आ रही है। हरिद्वार के कुछ वार्डों में मतदाता संख्या और उपलब्ध आंकड़ों के बीच विसंगतियां सामने आने से अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। कई मतदाताओं के पास पासपोर्ट साइज फोटो या अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, जिससे फॉर्म भरने की प्रक्रिया में विलंब हो रहा है।

चिलचिलाती धूप और बढ़ते तापमान ने भी बीएलओ की जिम्मेदारियों को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। दिनभर घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करना और जानकारी जुटाना आसान नहीं है। कई शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा तथा पालतू कुत्तों के कारण भी सुरक्षा संबंधी समस्याएं सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर लोगों के कार्यस्थल पर होने या दोपहर के समय आराम करने के कारण घरों के दरवाजे नहीं खुले, जिससे बीएलओ को दोबारा संपर्क करना पड़ रहा है।

इस बीच देहरादून स्थित लोकभवन में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने भी एसआईआर प्रक्रिया में भाग लेकर अभियान को समर्थन दिया। इससे मतदाताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने और अभियान को जनसहभागिता से जोड़ने का संदेश गया है।

राज्य निर्वाचन तंत्र का लक्ष्य है कि 7 जुलाई तक प्रत्येक मतदान क्षेत्र में घर-घर पहुंचकर मतदाताओं का सत्यापन और गणना प्रपत्रों का वितरण एवं संग्रहण सुनिश्चित किया जाए। अभियान के पहले दिन की तस्वीर यह दर्शाती है कि जहां लोगों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति जागरूकता और उत्साह दिखाई दे रहा है, वहीं भौगोलिक परिस्थितियां, पलायन, तकनीकी बाधाएं और मौसम जैसी चुनौतियां भी कम नहीं हैं।

फिर भी प्रशासन और बीएलओ की मेहनत यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है कि राज्य की मतदाता सूची पूरी तरह अद्यतन, पारदर्शी और त्रुटिरहित बने, ताकि लोकतंत्र की नींव और अधिक मजबूत हो सके।

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