जानकारी के अनुसार वाड़ी गांव निवासी 59 वर्षीय प्रभा देवी पत्नी मातबर सिंह मंगलवार दोपहर अपने पुराने मकान के समीप पशुओं के लिए घास लेने गई थीं। यह स्थान उनके घर से अधिक दूर नहीं था और ग्रामीण अक्सर वहां कृषि एवं पशुपालन से जुड़े कार्यों के लिए आते-जाते रहते हैं। इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक उन पर हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के अनुसार गुलदार ने महिला को संभलने तक का मौका नहीं दिया। हमले के बाद वह प्रभा देवी को घसीटते हुए पास ही स्थित एक खंडहरनुमा मकान तक ले गया। महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके की ओर दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर एकत्र हो गए।
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में पिछले काफी समय से गुलदार की गतिविधियां देखी जा रही थीं, जिससे लोगों में पहले से ही डर का माहौल बना हुआ था। घटना के बाद महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में विशेष रूप से दहशत फैल गई।
गढ़वाल वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) महातिम यादव ने बताया कि घटना के बाद गुलदार लगातार उसी क्षेत्र के आसपास मंडरा रहा था। इससे आशंका थी कि वह किसी अन्य व्यक्ति पर भी हमला कर सकता है। वन विभाग ने सबसे पहले उसे जीवित पकड़ने के लिए ट्रैंकुलाइज करने की योजना बनाई। विशेषज्ञ टीम और शिकारियों को मौके पर तैनात किया गया तथा गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
हालांकि परिस्थितियां लगातार चुनौतीपूर्ण बनी रहीं। गुलदार बेहद आक्रामक व्यवहार कर रहा था और आबादी वाले क्षेत्र के निकट घूम रहा था। ऐसे में ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई। वन विभाग की टीम ने कई घंटे तक प्रयास करने के बाद स्थिति का आकलन किया और जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिकारी को कार्रवाई की अनुमति दी। इसके बाद गुलदार को मार गिराया गया।
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की है। उनका कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में गुलदारों की संख्या बढ़ने और जंगलों के सिमटने के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। कई गांवों में लोग शाम ढलते ही घरों से निकलने से डरने लगे हैं।
स्थानीय लोगों ने मृतका के परिवार को उचित मुआवजा देने और क्षेत्र में गश्त बढ़ाने की मांग भी उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संवेदनशील इलाकों की नियमित निगरानी की जानी चाहिए।
प्रभा देवी की मृत्यु से गांव में शोक की लहर है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर गहरा दुख और चिंता व्याप्त है। वहीं वन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने तथा जंगल और सुनसान क्षेत्रों में अकेले न जाने की अपील की है।


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