प्रतापनगर के देवल गांव निवासी 18 वर्षीय दलित युवक केतन लाल की प्रेम-प्रसंग से जुड़े विवाद में हुई निर्मम हत्या के बाद पूरे टिहरी जनपद में आक्रोश का माहौल है। मंगलवार को जिला अस्पताल बौराड़ी में पोस्टमार्टम के बाद भी परिजनों ने कई घंटों तक शव उठाने से इनकार कर दिया। उनका साफ कहना था कि जब तक हत्या और मारपीट की घटना में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
सुबह करीब साढ़े दस बजे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन ने परिजनों को समझाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन शाम आठ बजे तक भी वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस ने मामले में केवल कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि घटना में कई अन्य लोग भी शामिल थे। उनका कहना था कि न्याय तभी संभव है जब सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाए।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार अस्पताल में मौजूद रहे। एसडीएम कमलेश मेहता, एएसपी दीपक कुमार और सीओ चंद्रमोहन ने परिजनों से बातचीत कर उन्हें आश्वस्त किया कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों ने सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी का भरोसा दिया, लेकिन देर रात तक परिजन और ग्रामीण अस्पताल परिसर में डटे रहे।
इस बीच प्रशासन ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मृतक के परिवार के लिए 8 लाख 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की। इसमें से 4 लाख 12 हजार रुपये की राशि तत्काल उपलब्ध करा दी गई। हालांकि परिजनों का कहना था कि आर्थिक सहायता से अधिक जरूरी न्याय है और वे दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई चाहते हैं।
केतन हत्याकांड को लेकर भीम आर्मी भी खुलकर सामने आई। संगठन के कार्यकर्ताओं ने परिजनों और ग्रामीणों के साथ जिला अस्पताल के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन करते हुए पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पुलिस मामले में पूरी गंभीरता नहीं दिखा रही है और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
उधर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे ने बताया कि पुलिस ने मामले में आरोपी यशवीर सिंह और उसके पिता विद्या सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को जेल भेजना पुलिस की पहली प्राथमिकता थी और अब मामले की विस्तृत विवेचना की जा रही है। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल और एसएसपी श्वेता चौबे ने भी मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। अधिकारियों ने कहा कि पीड़ित परिवार को हर स्तर पर न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
केतन हत्याकांड की गूंज अब राज्य स्तर तक पहुंच गई है। मूल निवासी संघ, भीम आर्मी और आंबेडकर जन विकास समिति सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की है। संगठनों ने पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग देने की भी मांग उठाई है।
वहीं, उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग ने भी इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए टिहरी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर दिया है। आयोग ने 15 जून तक मामले से जुड़े सभी अभिलेख और साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग की इस कार्रवाई को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
केतन हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक न्याय, कानून व्यवस्था और दलित अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। पूरे क्षेत्र की निगाहें अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर पीड़ित परिवार को न्याय कब और कैसे मिलता है।








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