डाक बांटने में लापरवाही पड़ी भारी, दो माह तक डाक रोकने पर डाककर्मी निलंबित

डाक बांटने में लापरवाही पड़ी भारी, दो माह तक डाक रोकने पर डाककर्मी निलंबित

सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के जाराजिबली डाकघर में लंबे समय तक डाक वितरण नहीं होने का मामला सामने आने के बाद विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने पर जाराजिबली में तैनात डाकसेवक पारुल को निलंबित कर दिया गया है। मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए डाक अधीक्षक ने तत्काल प्रभाव से निलंबन के आदेश जारी किए हैं। साथ ही क्षेत्र में डाक सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए अतिरिक्त डाककर्मी की तैनाती भी कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार जाराजिबली क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से डाक वितरण में हो रही देरी से परेशान थे। आरोप है कि करीब दो माह से विभिन्न प्रकार की डाक लोगों तक नहीं पहुंचाई गई थी। इनमें आधार कार्ड, सरकारी दस्तावेज, बैंकिंग संबंधी पत्राचार तथा अन्य महत्वपूर्ण डाक शामिल थीं। लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी।

मामला उस समय चर्चा में आया जब बीते शुक्रवार को जाराजिबली डाकघर में डाक वितरण को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और डाकसेवक पारुल के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। ग्रामीणों ने डाक समय पर नहीं बांटे जाने का विरोध किया और जवाब मांगा। आरोप है कि इस दौरान डाककर्मी का व्यवहार भी लोगों के प्रति उचित नहीं था। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने डाक वितरण में हो रही लापरवाही का मुद्दा उठाया तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

घटना के दौरान क्षेत्र पंचायत सदस्य रमेश धामी भी मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि बहस के दौरान डाककर्मी ने उन्हें झूठे मामले में फंसाने तक की धमकी दी। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो किसी स्थानीय व्यक्ति ने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद मामला जिलेभर में चर्चा का विषय बन गया और डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।

आक्रोशित ग्रामीणों ने डाकसेवक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए डाक अधीक्षक अशोक कुमार पाठक को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि डाककर्मी की लापरवाही के कारण लोगों को महत्वपूर्ण दस्तावेज समय पर नहीं मिल सके, जिससे उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने कहा कि आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज समय पर न मिलने से सरकारी योजनाओं और विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में भी बाधाएं उत्पन्न हुईं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डाक अधीक्षक अशोक कुमार पाठक ने तत्काल जांच के आदेश दिए। जांच की जिम्मेदारी धारचूला के डाक निरीक्षक आशीष राणा को सौंपी गई। जांच अधिकारी ने स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए, डाकघर के अभिलेखों की जांच की तथा लंबित डाक का सत्यापन किया। जांच के दौरान सामने आया कि बड़ी संख्या में डाक लंबे समय से वितरित नहीं की गई थी और शिकायतों में पर्याप्त तथ्य मौजूद थे।

जांच रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग ने डाकसेवक पारुल पर लगाए गए आरोपों को सही पाया। इसके आधार पर विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया। डाक अधीक्षक अशोक कुमार पाठक ने बताया कि डाक वितरण जैसी महत्वपूर्ण सेवा में इस प्रकार की लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक डाक का वितरण न होना गंभीर अनुशासनहीनता और कर्तव्य के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।

डाक अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि आम जनता तक समय पर डाक पहुंचाना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में डाक सेवाएं सुचारु रूप से जारी रखने के लिए अतिरिक्त डाककर्मी की तैनाती कर दी गई है, ताकि लंबित डाक का शीघ्र वितरण किया जा सके और लोगों को राहत मिल सके।

इस कार्रवाई के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने संतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि विभाग ने समय रहते कार्रवाई कर जनता की शिकायतों को गंभीरता से लिया है। वहीं, लोगों को उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा नहीं होगी और डाक सेवाएं पहले की तरह नियमित एवं प्रभावी ढंग से संचालित होंगी।

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