यूकेएसएसएससी के सचिव एन.एस. डुंगरियाल ने बताया कि आयोग ने पूर्व में हुई भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं और नकल प्रकरणों से सबक लेते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक मजबूत किया था। परीक्षा केंद्रों पर हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों के जरिए संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और तत्काल कार्रवाई करने की व्यवस्था की गई थी। निगरानी कार्य में आईटी क्षेत्र के विशेषज्ञों का भी सहयोग लिया गया।
आयोग के अनुसार स्नातक स्तरीय परीक्षा के लिए कुल 1 लाख 54 हजार 603 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 1 लाख 14 हजार 635 अभ्यर्थियों ने अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड किए थे। परीक्षा में कुल 83 हजार 254 अभ्यर्थी शामिल हुए, जिससे उपस्थिति प्रतिशत 72.62 दर्ज किया गया। आयोग ने इसे संतोषजनक उपस्थिति बताया है।
राजधानी देहरादून में परीक्षा को लेकर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। जिले में 116 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जहां सुबह से ही अभ्यर्थियों की भीड़ देखने को मिली। सभी केंद्रों पर पुलिस बल, मजिस्ट्रेट और परीक्षा पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई थी। प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की गहन जांच की गई और निर्धारित दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया गया। परीक्षा समाप्त होने के बाद अधिकांश अभ्यर्थियों ने पेपर को संतुलित और प्रतिस्पर्धात्मक बताया।
परीक्षा देकर बाहर निकले कई अभ्यर्थियों ने कहा कि प्रश्नपत्र का स्तर मिश्रित था। कुछ प्रश्न अपेक्षाकृत आसान थे, जबकि कुछ ने अभ्यर्थियों की तैयारी की वास्तविक परीक्षा ली। अभ्यर्थी रजनीश ने बताया कि पेपर का स्तर अच्छा था और जिन्होंने गंभीरता से तैयारी की थी, उनके लिए सफलता की संभावना बेहतर रहेगी। वहीं अन्य परीक्षार्थियों ने भी परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्थाओं की सराहना की।
परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या शिकायत का तत्काल समाधान करने के लिए पुलिस विभाग ने पहली बार प्रत्येक जिले में विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की थी। इन अधिकारियों को परीक्षा से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई थी। आयोग का दावा है कि पूरे प्रदेश में परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और कहीं से भी नकल या किसी बड़ी अनियमितता की सूचना नहीं मिली।
हालांकि परीक्षा के दौरान अल्मोड़ा जिले के रानीखेत क्षेत्र स्थित चिलियानौला के बीरशिवा स्कूल परीक्षा केंद्र से एक विवाद सामने आया। यहां कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें जो ओएमआर शीट दी गई, उसका क्रमांक उनकी उत्तर पुस्तिका पर अंकित क्रमांक से अलग था। चार अभ्यर्थियों ने इस संबंध में आपत्ति दर्ज कराते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
अभ्यर्थियों का कहना था कि ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिका के क्रमांक अलग होने से उनके परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। जब उन्होंने यह मुद्दा परीक्षा कक्ष में मौजूद निरीक्षकों और केंद्र कर्मियों के सामने उठाया तो उन्हें बताया गया कि इस संबंध में आयोग से पहले ही बात हो चुकी है और इससे किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। इसके बावजूद अभ्यर्थियों की चिंताएं बनी रहीं।
मामले पर यूकेएसएसएससी के अध्यक्ष जी.एस. मर्तोलिया ने स्पष्ट किया कि परीक्षा के दौरान कुल 66 अभ्यर्थियों की ओर से विभिन्न प्रकार की आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, जिनका मौके पर समाधान कर दिया गया। उन्होंने कहा कि ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिका में अलग-अलग क्रमांक होने से परिणाम या मूल्यांकन प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। आयोग ने इस व्यवस्था को तकनीकी रूप से सुरक्षित बताया है।
वहीं जिला प्रभारी प्रवीण राणा ने कहा कि मामले की पूरी जानकारी प्राप्त की जा रही है और यदि आवश्यकता हुई तो आयोग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी। बीरशिवा स्कूल की केंद्र प्रभारी प्रियंका आर्या ने भी पुष्टि की कि अभ्यर्थियों की शिकायत आयोग के संज्ञान में ला दी गई है।
कुल मिलाकर यूकेएसएसएससी की यह परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। एआई तकनीक और कड़ी निगरानी के कारण परीक्षा प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और सुरक्षित नजर आई। अब लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें आयोग द्वारा घोषित किए जाने वाले परिणामों पर टिकी हैं।


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