भारत के अंतिम गांव माणा में स्थित क्षेत्र रक्षक भगवान घंटाकर्ण मंदिर के कपाट सोमवार को वैदिक मंत्रोच्चारण और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाटोद्घाटन के अवसर पर माणा गांव सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और भक्ति का वातावरण देखने को मिला।
सोमवार सुबह लगभग नौ बजे कपाट खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई। इससे पहले मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया गया था। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर में जुटने लगी थी। स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में इस धार्मिक आयोजन में सहभागिता निभाई।
कपाटोद्घाटन की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद घन्याल मंदिर में विराजमान भगवान घंटाकर्ण की प्रतिमा को पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार शोभायात्रा के माध्यम से माणा गांव स्थित मुख्य मंदिर तक लाया गया। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने जयकारों और भक्ति गीतों के साथ भगवान का स्वागत किया। पूरे मार्ग में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
मंदिर पहुंचने के बाद भगवान घंटाकर्ण की प्रतिमा को विधिवत स्थापित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं ने भगवान घंटाकर्ण के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। कई श्रद्धालु दूर-दराज क्षेत्रों से विशेष रूप से इस अवसर पर माणा गांव पहुंचे थे।
कपाटोद्घाटन समारोह के दौरान महिला मंगल दल की ओर से भजन-कीर्तन और मांगलिक गीतों की प्रस्तुति दी गई। स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत कर आयोजन को और अधिक आकर्षक बना दिया। धार्मिक गीतों और ढोल-दमाऊं की मधुर धुनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
माणा गांव के ग्राम प्रधान धर्मेंद्र चौहान ने बताया कि भगवान घंटाकर्ण को बदरीनाथ क्षेत्र का रक्षक देवता माना जाता है और स्थानीय लोगों की उनके प्रति गहरी आस्था है। उन्होंने कहा कि कपाट खुलने के बाद अब पूरे यात्रा सीजन के दौरान श्रद्धालु नियमित रूप से मंदिर में दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचेंगे और क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं से जुड़ेंगे।
इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने भगवान घंटाकर्ण की महिमा का स्मरण करते हुए क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की। ग्रामीणों का मानना है कि भगवान घंटाकर्ण क्षेत्र के संरक्षक हैं और उनकी कृपा से बदरीनाथ धाम तथा आसपास के क्षेत्रों की रक्षा होती है।
इसी दौरान माणा गांव में एक अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन भी संपन्न हुआ। गांव में स्थित प्राचीन मंगलेश्वर मंदिर का विधिवत उद्घाटन किया गया। पूर्व ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा ने बताया कि मंगलेश्वर भगवान का यह मंदिर वर्षों पुराना है, जिसका हाल ही में ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से जीर्णोद्धार किया गया है। मंदिर के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण के बाद इसका उद्घाटन धार्मिक अनुष्ठानों के साथ किया गया।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंगलेश्वर महाराज को क्षेत्रपाल भगवान घंटाकर्ण का भाई माना जाता है और दोनों देवताओं की पूजा क्षेत्र में विशेष श्रद्धा के साथ की जाती है। मंदिर उद्घाटन समारोह में भी बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल हुए।
इस अवसर पर घंटाकर्ण के अवतारी पुरुष आशीष कनखोली, मंगलेश्वर के अवतारी पुरुष रघुवीर सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच संपन्न हुआ यह आयोजन माणा गांव की समृद्ध धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बन गया। कपाटोद्घाटन और मंदिर उद्घाटन के साथ ही क्षेत्र में यात्रा सीजन की धार्मिक गतिविधियों को नई गति मिली है।








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