उत्तराखंड में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। स्नातकोत्तर (पीजी) चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में कॉलेज ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एमडी, एमएस और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की कुल सीटों की संख्या 64 तक पहुंचा दी है। संस्थान ने आने वाले वर्षों में इन सीटों को बढ़ाकर 100 तक करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। यह कदम न केवल चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वर्ष 2021 में मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में पीजी पाठ्यक्रमों की शुरुआत हुई थी। प्रारंभिक चरण में सीमित विषयों और कम सीटों के साथ शुरू हुए इन पाठ्यक्रमों ने कुछ ही वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। वर्तमान में कॉलेज विभिन्न विषयों में एमडी, एमएस और डिप्लोमा स्तर की शिक्षा प्रदान कर रहा है। इस दौरान संस्थान से लगभग 100 से 150 विशेषज्ञ चिकित्सक तैयार होकर निकल चुके हैं, जो उत्तराखंड के विभिन्न जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के विकास में राज्य सरकार की नीतियों और स्वास्थ्य शिक्षा को लेकर किए गए प्रयासों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के कार्यकाल में कॉलेज में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार तथा स्थायी फैकल्टी की नियुक्तियों पर विशेष ध्यान दिया गया। इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और पीजी सीटों के विस्तार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद कॉलेज को विभिन्न विभागों में सीट वृद्धि की स्वीकृति मिलती रही है। पिछले एक वर्ष के दौरान एनेस्थीसियोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, स्त्री एवं प्रसूति रोग (गायनी) तथा टीबी एवं चेस्ट रोग विभागों में कुल 12 नई पीजी सीटों की बढ़ोतरी हुई है। इससे कॉलेज में विशेषज्ञता आधारित चिकित्सा शिक्षा को और अधिक मजबूती मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में मरीजों को विशेषज्ञ उपचार के लिए अक्सर बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में पीजी सीटों की संख्या बढ़ने से राज्य के भीतर ही अधिक संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सक तैयार होंगे, जो भविष्य में पर्वतीय जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
इसके साथ ही राज्य के छात्र-छात्राओं को भी अब उच्च चिकित्सा शिक्षा के लिए अन्य राज्यों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। उन्हें अपने ही प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण पीजी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे आर्थिक बोझ कम होने के साथ-साथ स्थानीय प्रतिभाओं को बेहतर मंच भी उपलब्ध होगा।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि आगामी वर्षों में अन्य विभागों में भी पीजी सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। एनएमसी के मानकों के अनुरूप फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुसंधान सुविधाओं और अस्पताल सेवाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। संस्थान का उद्देश्य केवल सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्टता स्थापित करना भी है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पीजी सीटों की संख्या का 64 तक पहुंचना संस्थान के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सफलता कॉलेज के शिक्षकों, चिकित्सकों, कर्मचारियों और पूरी टीम की मेहनत का परिणाम है। उनका लक्ष्य मेडिकल कॉलेज को चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में एनएमसी के सभी मानकों को पूरा करते हुए पीजी सीटों की संख्या 100 तक पहुंचाने का लक्ष्य भी हासिल कर लिया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज श्रीनगर की यह उपलब्धि न केवल संस्थान के विकास की कहानी कहती है, बल्कि उत्तराखंड के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की बढ़ती संख्या भविष्य में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती प्रदान करेगी और आम लोगों को बेहतर इलाज की सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।








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