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नगरासू गुरुद्वारा विवाद समाप्त, कार्रवाई न होने पर स्थानीय लोगों में आक्रोश

नगरासू क्षेत्र बीते चार दिनों से तनाव के माहौल से गुजर रहा था। गुरुद्वारे में डेरा डाले निहंग सिखों और प्रबंधन के बीच विवाद के चलते पुलिस, आईटीबीपी तथा अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ी। क्षेत्र में लगातार बढ़ते तनाव के कारण स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा की भावना बनी रही।

गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत ने पूरे प्रकरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि प्रशासन के पास पर्याप्त सुरक्षा बल मौजूद थे तो मामले का समाधान पहले ही क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि चार दिनों तक गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जे जैसी स्थिति बनी रही, जिससे स्थानीय लोग भयभीत रहे।

युवा नेता मोहित डिमरी ने भी प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि शांत वातावरण को खराब करने का प्रयास किया गया और चार दिनों तक स्थानीय लोगों के साथ-साथ सरकारी मशीनरी को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत और जिला पंचायत सदस्य संपन्न नेगी ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विवाद के दौरान गुरुद्वारा परिसर में तनावपूर्ण माहौल, कथित तोड़फोड़ और भय की स्थिति बनी रही। गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से भी परिसर में अव्यवस्था और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसके बावजूद विवाद समाप्त होने के बाद निहंगों को बिना किसी कार्रवाई के पंजाब भेज दिया गया।

लोगों के आक्रोश का एक कारण यह भी है कि निहंगों के रवाना होने के दौरान उन्होंने जयकारे लगाए और मोटरसाइकिलों पर जाते समय उत्साह का प्रदर्शन किया। स्थानीय निवासी गौरव चौधरी ने कहा कि पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस पर पत्थरबाजी और धारदार हथियारों के प्रदर्शन जैसे आरोप सामने आए, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बना रहा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं होगी तो कानून व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों ने निर्णय लिया है कि इस पूरे मामले को लेकर जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करेगा तथा उन्हें लिखित तहरीर सौंपकर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग करेगा।

वहीं मंगलवार को विवाद के समाधान के लिए पंजाब से पहुंचे शिष्टमंडल ने गुरुद्वारे में निहंगों और प्रबंधन के साथ करीब तीन घंटे तक वार्ता की। सुबह 11:30 बजे शुरू हुई बातचीत में सतज्ञानी हरनाम सिंह खालसा भिंडरावाले और आनंदपुर साहिब से आए जत्थेदार बाबा अजीत सिंह भी मौजूद रहे। लंबी चर्चा के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और शाम करीब चार बजे पांचों निहंगों को सुरक्षा व्यवस्था के बीच पंजाब रवाना कर दिया गया।

आनंदपुर साहिब से आए जत्थेदार बाबा अजीत सिंह ने कहा कि सभी लोग शांति चाहते हैं और उत्तराखंड के लोग उनके भाई हैं। उन्होंने कहा कि निहंगों में कर्णप्रयाग की घटना को लेकर आक्रोश था, लेकिन गुरुद्वारे पर कब्जे की बात सही नहीं है। उनके अनुसार निहंग अपने धार्मिक स्थल पर ही रुके हुए थे और पुलिस कार्रवाई की आशंका के कारण छत पर चले गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि कानून से बड़ा कोई नहीं है और कर्णप्रयाग मामले में पुलिस तथा प्रशासन अपना कार्य कर रहे हैं।

हालांकि प्रशासन और पुलिस ने विवाद समाप्त होने के बाद राहत की सांस ली है, लेकिन स्थानीय लोगों के मन में अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्थानीय लोगों द्वारा प्रस्तावित तहरीर के बाद प्रशासन इस पूरे मामले में आगे क्या कदम उठाता है।

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Hill Mail

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