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नगरासू प्रकरण में न्याय की मांग को लेकर रुद्रप्रयाग में जुटे क्षेत्रीय दल, सत्याग्रह का ऐलान

कर्णप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। 25 जून को कुछ निहंग समूहों द्वारा उत्तराखंड आने की चेतावनी के बाद गुरुवार को रुद्रप्रयाग के गुलाबराय मैदान में विभिन्न क्षेत्रीय दलों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग एकजुट हुए। जनसभा में वक्ताओं ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं, बल्कि पहाड़ के स्वाभिमान, कानून व्यवस्था और न्याय से जुड़ा विषय है। उन्होंने नगरासू प्रकरण में कथित रूप से उपद्रव करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक तरीके से सत्याग्रह किया जाएगा।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित जनसभा में उत्तराखंड क्रांति दल के युवा नेता आशीष नेगी, उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के नेता त्रिभुवन चौहान, युवा नेता मोहित डिमरी, उक्रांद नेता आशुतोष नेगी, नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत सहित विभिन्न क्षेत्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभा में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे।

वक्ताओं ने कहा कि नगरासू की घटना ने प्रदेश की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना था कि यदि पहाड़ के लोगों के सम्मान और स्वाभिमान को चुनौती दी जाएगी तो उसका लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से जवाब दिया जाएगा। सभा में यह भी कहा गया कि उत्तराखंड जैसे शांत राज्य में किसी भी प्रकार की अराजकता या भय का माहौल स्वीकार नहीं किया जाएगा।

युवा नेता आशीष नेगी ने कहा कि नगरासू की घटना में शासन और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। उन्होंने मांग की कि हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी चारधाम यात्रा और अन्य धार्मिक यात्राओं के दौरान हथियार लेकर आने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। उनका कहना था कि इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी और प्रदेश में शांति एवं सुरक्षा बनी रहेगी।

उत्तराखंड क्रांति दल के नेता आशुतोष नेगी ने कहा कि नगरासू में कथित तौर पर गुरुद्वारे में प्रवेश, तोड़फोड़ और स्थानीय लोगों के साथ अभद्र व्यवहार जैसी घटनाओं के बाद संबंधित लोगों को सम्मानपूर्वक भेजा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि आरोपित व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक की जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि उनके विरुद्ध किन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने मामले की जांच हरिद्वार स्थानांतरित किए जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए जांच चमोली या रुद्रप्रयाग जिले में ही होनी चाहिए।

इसी बीच नगरासू विवाद का मुद्दा चमोली जिला पंचायत की बैठक में भी गूंजा। बैठक के दौरान जिला पंचायत सदस्यों ने ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित कर प्रकरण की जांच हरिद्वार के बजाय चमोली और रुद्रप्रयाग जिले को सौंपने की मांग की। जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट ने कहा कि घटना के दौरान प्रशासन और पुलिस पर पथराव हुआ तथा कई दिनों तक क्षेत्र में भय का वातावरण बना रहा। उन्होंने सरकार से निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

जनसभा में वक्ताओं ने कई मांगें भी रखीं। इनमें नगरासू विवाद की निष्पक्ष जांच, चारधाम यात्रा के दौरान हथियारों के साथ यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध, जांच को हरिद्वार से वापस लेकर चमोली या रुद्रप्रयाग को सौंपना, घायल स्थानीय नागरिकों के उपचार का पूरा खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन करना तथा कर्णप्रयाग में दर्ज मामले को हरिद्वार स्थानांतरित करने का निर्णय वापस लेना शामिल है।

उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के नेता त्रिभुवन चौहान ने कहा कि नगरासू प्रकरण के बाद कानून व्यवस्था को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है और सरकार को इस मामले में पारदर्शी कार्रवाई करनी चाहिए। युवा नेता मोहित डिमरी ने चारधाम यात्रा के लिए ठोस नीति बनाने तथा हथियारों के साथ भय का वातावरण बनाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की। नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत ने कहा कि पहाड़ के स्वाभिमान और सामाजिक सौहार्द की रक्षा के लिए सभी क्षेत्रीय लोगों को एकजुट रहना होगा।

कार्यक्रम का संचालन मोहित डिमरी ने किया। इस अवसर पर ज्योति दानू, अर्जुन कंडारी, सरस्वती देवी, हैप्पी असवाल, सूरत सिंह सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और क्षेत्रीय दलों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभा के अंत में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में हैं तथा नगरासू प्रकरण में निष्पक्ष जांच और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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Hill Mail

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