उत्तराखंड में मानसून की दस्तक, अगले चार दिन झमाझम बारिश के आसार; भारी से बेहद भारी वर्षा का अलर्ट जारी

उत्तराखंड में मानसून की दस्तक, अगले चार दिन झमाझम बारिश के आसार; भारी से बेहद भारी वर्षा का अलर्ट जारी

लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मानसून ने उत्तराखंड में दस्तक दे दी है। मंगलवार को मानसून ने प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में प्रवेश कर लिया, जिसके बाद कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में मानसून पूरे राज्य में पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। इसके साथ ही दो जुलाई से वर्षा की तीव्रता और बढ़ने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के अधिकांश जिलों में अगले चार दिनों तक भारी से बेहद भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसको देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार नमी मिलने के कारण उत्तराखंड में मानसून तेजी से सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से राज्य के पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में व्यापक वर्षा होने की संभावना है। कई स्थानों पर तेज बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।

मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक रोहित थपलियाल ने बताया कि एक जुलाई के लिए देहरादून और बागेश्वर जिलों में बहुत भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, अन्य जिलों में भी भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। उन्होंने कहा कि दो, तीन और चार जुलाई को भी प्रदेश में मौसम का यही रुख बना रहेगा और कई क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश देखने को मिल सकती है।

लगातार होने वाली बारिश को देखते हुए मौसम विभाग ने पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने और मलबा आने की आशंका जताई है। विशेष रूप से चारधाम यात्रा मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्गों और पहाड़ी संपर्क मार्गों पर यात्रा करने वालों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। भारी बारिश के चलते कई स्थानों पर सड़कें अवरुद्ध हो सकती हैं, जिससे यातायात प्रभावित होने की संभावना है।

मौसम विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि लगातार वर्षा के कारण नदियों, गदेरों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

संभावित खतरे को देखते हुए राज्य प्रशासन और जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ और संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। भूस्खलन संभावित स्थानों की निगरानी बढ़ा दी गई है, जबकि सड़कें बाधित होने की स्थिति में मशीनें और राहत दल भी तैयार रखे गए हैं।

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि मौसम खराब होने की स्थिति में अनावश्यक यात्रा करने से बचें। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोग मौसम की ताजा जानकारी लेने के बाद ही घर से निकलें। यदि किसी कारणवश यात्रा करना आवश्यक हो तो प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और सुरक्षित मार्गों का ही उपयोग करें।

लोगों को भारी बारिश के दौरान नदी, नालों और गदेरों के पास न जाने की सलाह दी गई है। जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रवेश करने से भी बचने को कहा गया है। बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों में खड़े होने या पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचने की सलाह दी गई है।

उत्तराखंड में हर वर्ष मानसून के दौरान भूस्खलन, सड़क बंद होने और बाढ़ जैसी घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में इस बार भी मौसम विभाग और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से भी मौसम की जानकारी लेते रहने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले चार दिन प्रदेश के लिए संवेदनशील रह सकते हैं। यदि अनुमान के अनुरूप भारी वर्षा होती है तो कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय होगी।

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