बैठक में केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि (सीआरआईएफ) के तहत वर्ष 2026-27 के लिए उत्तराखंड सरकार की लगभग 750 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी देने पर सहमति व्यक्त की गई। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी पांच प्रमुख परियोजनाओं को भी स्वीकृति मिली, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग 2,966 करोड़ रुपये है।
इन परियोजनाओं में श्रीनगर बाइपास का निर्माण, पुरकाजी-लक्सर-हरिद्वार मार्ग को चार लेन में विकसित करने का कार्य, लोहाघाट बाइपास और पिथौरागढ़ बाइपास की एलाइनमेंट को मंजूरी जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा मझोला से खटीमा तक आबादी वाले हिस्सों में फोरलेन सड़क का विस्तार तथा रामनगर-रानीखेत (मोहन) मार्ग के सुदृढ़ीकरण पर भी सहमति बनी। इन परियोजनाओं के पूरा होने से कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों के बीच यातायात अधिक सुरक्षित और सुगम होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में वर्ष 2027 में प्रस्तावित कुंभ मेले को देखते हुए हरिद्वार बाइपास परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने का विशेष अनुरोध किया। उन्होंने कोटद्वार बाइपास के निर्माण कार्य में भी तेजी लाने की मांग रखी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दोनों प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों को स्पर मार्गों के माध्यम से अन्य प्रमुख सड़कों से जोड़ने की परियोजनाओं के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक सहमति देने का भी अनुरोध किया गया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है, जिससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके।
मुख्यमंत्री धामी ने केंद्र सरकार से वर्ष 2025-26 के लिए लंबित 530.11 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति राशि जल्द जारी करने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में चल रही सड़क परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी और विकास कार्यों की गति बनी रहेगी।
बैठक में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) से जुड़ी लंबित परियोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग, सीमावर्ती क्षेत्रों की सड़क कनेक्टिविटी तथा रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मार्गों के निर्माण और सुधार कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
अल्मोड़ा जिले के लिए भी एक महत्वपूर्ण घोषणा हुई। सिकुड़ा बैंड से राष्ट्रीय राजमार्ग-309 तक टनल सहित मोटर मार्ग निर्माण की लगभग 300 करोड़ रुपये लागत वाली परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र के लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी और यात्रा का समय भी कम होगा।
बैठक में उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन मैनेजमेंट सेंटर के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों के लिए वैज्ञानिक उपचार और स्थायी समाधान तैयार करने हेतु डीपीआर बनाने के लिए केंद्र से सहयोग का अनुरोध किया। इस संबंध में एमओयू करने के प्रस्ताव को भी मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। इससे भविष्य में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने बैठक में यह भी सुझाव दिया कि कम दरों पर प्राप्त निविदाओं के मामलों में अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी की वर्तमान व्यवस्था में आवश्यक संशोधन किया जाए, ताकि विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक बाधाएं न आएं और निर्माण कार्य समय पर पूरे हो सकें।
इसके अलावा हिना-तेखला-नेताला-गरमपानी राष्ट्रीय राजमार्ग खंड की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तथा जोशीमठ बाइपास के संशोधित प्रस्तावों को भी जल्द स्वीकृति देने का अनुरोध किया गया, जिस पर मंत्रालय ने सकारात्मक विचार का भरोसा दिलाया।
बैठक के बाद माना जा रहा है कि इन परियोजनाओं को गति मिलने से उत्तराखंड की सड़क कनेक्टिविटी में व्यापक सुधार होगा। इससे चारधाम यात्रा, पर्यटन, सीमांत क्षेत्रों तक पहुंच, औद्योगिक विकास और आपदा प्रबंधन की क्षमता भी मजबूत होगी। राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र और राज्य के समन्वय से सड़क अवसंरचना को नई ऊंचाई मिलेगी, जिसका लाभ प्रदेश की जनता के साथ-साथ हर वर्ष आने वाले लाखों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी मिलेगा।


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