उत्तराखंड के सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान (अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज) में रैगिंग का मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन हरकत में आ गया है। एमबीबीएस बैच 2023 के छात्रों ने कॉलेज के एक पीजी (स्नातकोत्तर) छात्र पर अभद्र व्यवहार और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। शिकायत मिलने के बाद संस्थान में एंटी रैगिंग तंत्र सक्रिय हो गया है और मामले की जांच के लिए एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक बुलाई गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित छात्र के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार एमबीबीएस बैच 2023 के कुछ विद्यार्थियों ने एंटी रैगिंग हेल्पलाइन के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कॉलेज के एक पीजी छात्र ने उनके साथ अनुचित और अभद्र व्यवहार किया। छात्रों का कहना है कि इस घटना के बाद वे मानसिक रूप से परेशान और भयभीत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कॉलेज प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायत मिलते ही कॉलेज प्रशासन में हलचल मच गई। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक बुलाने का निर्णय लिया। यह बैठक एक जुलाई को सुबह 10:30 बजे प्राचार्य कार्यालय के सभागार में आयोजित की जाएगी, जिसमें शिकायत से जुड़े सभी तथ्यों की समीक्षा की जाएगी और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि रैगिंग जैसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी छात्र के खिलाफ संस्थान के नियमों के साथ-साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के एंटी रैगिंग प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें चेतावनी, निलंबन, निष्कासन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने कहा कि छात्रों की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एंटी रैगिंग कमेटी सभी पक्षों की बात सुनने के बाद तथ्यों के आधार पर निर्णय लेगी। यदि कोई छात्र दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज परिसर में सुरक्षित और भयमुक्त शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
रैगिंग की घटनाएं केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक उत्पीड़न का भी कारण बनती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं का असर छात्रों के आत्मविश्वास, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसी वजह से देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी रैगिंग नियमों को सख्ती से लागू किया गया है और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए हेल्पलाइन तथा निगरानी समितियों की व्यवस्था की गई है।
अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में सामने आए इस मामले ने एक बार फिर मेडिकल शिक्षण संस्थानों में रैगिंग रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता को रेखांकित किया है। हालांकि अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और निष्पक्ष जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरे मामले पर छात्रों और अभिभावकों की नजर बनी हुई है। एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और दोषी पाए जाने पर संबंधित छात्र के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। कॉलेज प्रशासन ने सभी विद्यार्थियों से अपील की है कि यदि उनके साथ किसी भी प्रकार की रैगिंग या उत्पीड़न की घटना होती है तो वे बिना किसी डर के इसकी जानकारी संस्थान या एंटी रैगिंग हेल्पलाइन को दें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके और परिसर में सुरक्षित, सम्मानजनक तथा सकारात्मक शैक्षणिक माहौल कायम रखा जा सके।








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