केदारनाथ यात्रा मार्ग पर गुरुवार को उस समय अप्रत्याशित स्थिति पैदा हो गई, जब सोनप्रयाग में प्रस्तावित मॉक ड्रिल शुरू होने से ठीक पहले मुनकटिया क्षेत्र में पहाड़ी से अचानक पत्थर और मलबा गिरने लगा। आपदा प्रबंधन एजेंसियां जहां संभावित आपदा से निपटने के अभ्यास की तैयारी में जुटी थीं, वहीं कुछ ही मिनटों में उन्हें वास्तविक आपदा से निपटने के लिए मैदान में उतरना पड़ा। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। आधे घंटे के भीतर मलबा हटाकर मार्ग को फिर से चालू किया गया और दोनों ओर फंसे यात्रियों को सुरक्षित पार कराया गया।
गुरुवार सुबह लगभग 9:44 बजे सेक्टर अधिकारी सोनप्रयाग को सूचना मिली कि मुनकटिया क्षेत्र में पहाड़ी से अचानक पत्थर और मलबा गिरने के कारण केदारनाथ यात्रा मार्ग अवरुद्ध हो गया है। लगातार हो रही बारिश के चलते पहाड़ी कमजोर हो गई थी, जिसके कारण यह घटना सामने आई। प्रशासन ने किसी भी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए तत्काल यात्रा मार्ग पर वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी।
उस समय सोनप्रयाग में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मॉक ड्रिल की तैयारियों में लगी हुई थीं। लेकिन वास्तविक घटना की सूचना मिलते ही पूरा दल अभ्यास छोड़कर तत्काल मुनकटिया के लिए रवाना हो गया। कुछ ही समय में राहत एवं बचाव दल घटनास्थल पर पहुंच गया और स्थिति का जायजा लेकर कार्रवाई शुरू कर दी।
एसडीआरएफ के उप निरीक्षक आशीष डिमरी के नेतृत्व में जवानों ने सबसे पहले प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित किया। इसके बाद एनडीआरएफ की टीम ने भी मोर्चा संभाला और प्रशासन के समन्वय से जेसीबी मशीन मौके पर बुलवाई गई। मशीन की सहायता से सड़क पर जमा मलबा और पत्थरों को तेजी से हटाया गया, जबकि सुरक्षा कर्मी लगातार पहाड़ी पर नजर बनाए रहे ताकि दोबारा मलबा आने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
राहत कार्य के दौरान यात्रा मार्ग के दोनों ओर कई श्रद्धालु और स्थानीय लोग फंस गए थे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टीम ने यात्रियों को नियंत्रित तरीके से सुरक्षित स्थानों पर रोके रखा। जैसे ही मार्ग आंशिक रूप से सुरक्षित हुआ, जवानों ने एक-एक कर यात्रियों को सावधानीपूर्वक सड़क पार कराई। इस दौरान दोनों ओर फंसे करीब 11 यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। पूरे अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि या चोट की सूचना नहीं मिली।
उप निरीक्षक आशीष डिमरी ने बताया कि सूचना मिलने के तुरंत बाद टीम मौके पर पहुंच गई थी। राहत कार्य में तेजी लाते हुए लगभग आधे घंटे के भीतर मलबा हटाकर मार्ग को सुरक्षित बना दिया गया। इसके बाद प्रशासन की निगरानी में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही फिर से शुरू करा दी गई।
मुनकटिया क्षेत्र केदारनाथ हाईवे का संवेदनशील हिस्सा माना जाता है। मानसून के दौरान यहां कई बार भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। इससे चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को अक्सर परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रशासन लगातार ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठा रहा है।
इस घटना ने यह भी साबित कर दिया कि आपदा प्रबंधन एजेंसियों की तैयारियां केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं। मॉक ड्रिल की तैयारी कर रही एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने वास्तविक आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए राहत कार्य को प्रभावी ढंग से अंजाम दिया। समय पर पहुंची टीमों की तत्परता के कारण न केवल मार्ग जल्दी खुल सका, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकी।
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि मानसून के दौरान केदारनाथ यात्रा करते समय मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा शुरू करें। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में प्रशासन और पुलिस के निर्देशों का पालन करें तथा किसी भी आपात स्थिति में धैर्य बनाए रखें। अधिकारियों ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और यात्रा मार्ग पर तैनात सभी एजेंसियां चौबीसों घंटे सतर्क हैं, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य किया जा सके।








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