मणिपुर के उखरुल जिले में असम राइफल्स के काफिले पर हुए घात लगाकर किए गए हमले में उत्तराखंड के वीर सपूत हवलदार चंद्र मोहन सिंह शहीद हो गए। इस हमले में एक अन्य सैनिक वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह ने भी सर्वोच्च बलिदान दिया। घटना के बाद पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर है और लोग अपने वीर जवान को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, यह हमला 6 जुलाई को दोपहर करीब 1:40 बजे उस समय हुआ जब 40 असम राइफल्स का काफिला उखरुल से अपने बेस कैंप शांगशाक की ओर जा रहा था। रास्ते में घात लगाए हमलावरों ने अचानक काफिले पर हमला कर दिया। हमले में हवलदार चंद्र मोहन सिंह और वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
उखरुल पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक मार्चांग डब्ल्यू ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारी तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। पूरे इलाके की घेराबंदी की गई और उखरुल तथा शांगशाक से असम राइफल्स के जवानों के साथ संयुक्त सर्च अभियान चलाया गया। हालांकि, हमले में शामिल आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिल सका। सुरक्षा एजेंसियां पूरे क्षेत्र में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं।
हवलदार चंद्र मोहन सिंह की शहादत की खबर जैसे ही उत्तराखंड पहुंची, उनके परिवार और गांव में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने कहा कि चंद्र मोहन सिंह बचपन से ही देश सेवा का सपना देखते थे और उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होकर अपने सपने को पूरा किया। अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित चंद्र मोहन सिंह ने अंत तक मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
उत्तराखंड लंबे समय से देश को बड़ी संख्या में सैनिक देने वाला राज्य रहा है। यहां के हजारों युवा भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। राज्य के लगभग हर जिले से सैनिक देश की सीमाओं और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं। यही कारण है कि जब भी देश के किसी कोने में कोई उत्तराखंड का जवान शहीद होता है, पूरा प्रदेश उस दुख को अपना व्यक्तिगत नुकसान मानता है।
प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों, पूर्व सैनिकों और स्थानीय लोगों ने शहीद चंद्र मोहन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान कभी भुलाया नहीं जाएगा। लोगों ने केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से हमले के दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि देश के वीर जवानों पर हमला करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर के कुछ संवेदनशील इलाकों में उग्रवादी गतिविधियां समय-समय पर सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बनती रही हैं। ऐसे क्षेत्रों में तैनात जवान कठिन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा बलों के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर किया है।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां हमले की हर पहलू से जांच कर रही हैं। घटनास्थल के आसपास तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है और हमलावरों की पहचान के लिए खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई जारी है। वहीं, शहीद हवलदार चंद्र मोहन सिंह के पार्थिव शरीर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव लाए जाने की तैयारी की जा रही है। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।
उत्तराखंड के वीर सपूत हवलदार चंद्र मोहन सिंह का यह सर्वोच्च बलिदान प्रदेश ही नहीं, पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उनका साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।








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