Home शिखर पर उत्तराखंडी संघर्ष रंग लाया: चाय की दुकान चलाने वाले पिता के बेटे अनुराग पुरोहित ने नीट में 99.93 पर्सेंटाइल हासिल कर रचा इतिहास
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संघर्ष रंग लाया: चाय की दुकान चलाने वाले पिता के बेटे अनुराग पुरोहित ने नीट में 99.93 पर्सेंटाइल हासिल कर रचा इतिहास

सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच यदि हौसले बुलंद हों, तो सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचना संभव है। चमोली जिले के कर्णप्रयाग निवासी अनुराग पुरोहित ने इसका प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल के पूर्व छात्र अनुराग ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में 720 में से 655 अंक प्राप्त करते हुए 99.93 पर्सेंटाइल हासिल की है। इसके साथ ही उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1202 प्राप्त कर अपने परिवार, विद्यालय और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

अनुराग की सफलता केवल एक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, धैर्य, आत्मविश्वास और मां की मेहनत का परिणाम है। उनके पिता स्वर्गीय अशोक पुरोहित कर्णप्रयाग में चाय की एक छोटी दुकान चलाते थे। पिता के असमय निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। ऐसे कठिन समय में अनुराग की मां गीता देवी ने हार नहीं मानी और सब्जी की दुकान चलाकर अपने बेटे और छोटी बेटी का पालन-पोषण किया। उन्होंने तमाम चुनौतियों के बावजूद अपने बच्चों की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी।

अनुराग ने भी अपनी मां के संघर्ष और त्याग को समझा। उन्होंने अपनी पढ़ाई को ही जीवन का लक्ष्य बनाया और कठिन परिश्रम के साथ लगातार आगे बढ़ते रहे। नीट परीक्षा में यह उनकी चौथी कोशिश थी। इससे पहले तीन प्रयासों में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

तीसरे प्रयास में अनुराग का चयन दून मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए हो गया था और वे प्रथम वर्ष की पढ़ाई भी कर रहे थे। हालांकि उनका सपना हमेशा से देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में प्रवेश पाने का था। इसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने दोबारा नीट परीक्षा देने का निर्णय लिया। उनकी मेहनत रंग लाई और इस बार उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऐसा परिणाम हासिल किया, जिससे अब उनका एम्स में पढ़ाई करने का सपना पूरा होने जा रहा है।

अनुराग की सफलता उन लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सफलता परिस्थितियों से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, निरंतर प्रयास और मेहनत से हासिल होती है। उनकी उपलब्धि यह संदेश भी देती है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की दिशा में एक नया अवसर होती है।

अनुराग की इस उपलब्धि पर श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल परिवार में भी खुशी का माहौल है। विद्यालय के प्रधानाचार्य बुद्धिबल्लभ डोभाल ने कहा कि अनुराग की सफलता विद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अनुराग भविष्य में एक कुशल और संवेदनशील चिकित्सक बनकर समाज की सेवा करेंगे।

विद्यालय के शिक्षकों सुमन कुमार, गंभीर सिंह, संगीता पंवार, सोनाली बिष्ट और रितु मैठाणी सहित गुरु राम राय एजुकेशन मिशन ने भी अनुराग को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। स्थानीय लोगों और क्षेत्रवासियों ने भी अनुराग तथा उनकी मां गीता देवी को बधाई दी और इसे पूरे कर्णप्रयाग के लिए गौरव का क्षण बताया।

आज अनुराग पुरोहित की सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और परिवार का साथ मिले, तो कोई भी बाधा मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। संघर्ष की कठिन राह पर चलकर हासिल की गई यह सफलता निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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Hill Mail

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