उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ परिवहन विभाग अब सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है। युवाओं और कुछ वाहन चालकों में वाहनों को अलग लुक देने तथा सड़क पर अपनी मौजूदगी का अहसास कराने के लिए तेज आवाज वाले प्रेशर हॉर्न लगाने का चलन बढ़ रहा है। बाजारों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और आबादी वाले क्षेत्रों में इनका इस्तेमाल आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। अब ऐसे वाहन चालकों पर कार्रवाई और जुर्माने की प्रक्रिया को और कड़ा किया जाएगा।
परिवहन विभाग के अनुसार, प्रेशर हॉर्न से निकलने वाली तेज आवाज ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने के साथ-साथ सड़क पर दूसरे वाहन चालकों की एकाग्रता भी भंग करती है। अचानक तेज आवाज सुनाई देने पर चालक घबरा सकता है या वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे सड़क दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों के लिए तेज आवाज वाले हॉर्न काफी परेशानी पैदा करते हैं।
दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 हजार का चालान
विभाग ने प्रेशर हॉर्न के मामलों में कार्रवाई का स्वरूप सख्त करने का निर्णय लिया है। प्रेशर हॉर्न लगा वाहन पहली बार पकड़े जाने पर चालक या वाहन स्वामी को चेतावनी दी जाएगी। हालांकि, यदि वही वाहन दूसरी बार प्रेशर हॉर्न के साथ पकड़ा जाता है तो वाहन स्वामी पर 10 हजार रुपये का चालान लगाया जाएगा। वर्तमान में ऐसे मामलों में दो हजार रुपये के चालान का प्रविधान है। नए प्रावधान के लागू होने के बाद उल्लंघन करने वालों पर आर्थिक बोझ काफी बढ़ जाएगा।
अपर परिवहन आयुक्त एसके सिंह के अनुसार, मोटर यान अधिनियम में इस संबंध में संशोधन किया गया है। प्रदेश में संशोधित प्रावधान को लागू करने के लिए जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमें जांच अभियान के दौरान ऐसे वाहनों पर कार्रवाई करेंगी।
कंपनी से अलग हॉर्न लगाने पर भी नजर
परिवहन विभाग की नजर उन वाहनों पर भी रहेगी, जिनमें कंपनी की ओर से लगाए गए मूल हॉर्न को हटाकर अलग से तेज आवाज वाले हॉर्न लगाए जाते हैं। कई मामलों में वाहन चालक अपने वाहन को आकर्षक या प्रभावशाली दिखाने के लिए बाजार से प्रेशर हॉर्न लगवा लेते हैं। ऐसे हॉर्न यातायात नियमों के उल्लंघन के साथ ध्वनि प्रदूषण का भी कारण बनते हैं।
ध्वनि प्रदूषण के साथ हादसों का खतरा
विभाग का मानना है कि सड़क सुरक्षा के लिए केवल तेज रफ्तार और शराब पीकर वाहन चलाने जैसे मामलों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। वाहन चालकों का ध्यान भटकाने वाले कारकों पर भी नियंत्रण जरूरी है। प्रेशर हॉर्न की तेज और अचानक आने वाली आवाज दूसरे वाहन चालक को असहज कर सकती है। इससे वाहन का संतुलन बिगड़ने और दुर्घटना होने की संभावना रहती है।
प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर भी होगी कार्रवाई
परिवहन विभाग ने केवल ध्वनि प्रदूषण ही नहीं, बल्कि वायु प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर भी सख्ती करने की तैयारी की है। निर्धारित सीमा से अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों को अब केवल चेतावनी देकर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि सीधे चालान की कार्रवाई की जाएगी। प्रवर्तन टीमें वाहन जांच के दौरान ध्वनि और उत्सर्जन मानकों की भी जांच करेंगी। मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग का उद्देश्य नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ सड़क सुरक्षा और आम लोगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना है। आने वाले दिनों में जांच अभियान तेज होने की संभावना है।








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