आयोजन की तैयारियों को लेकर शनिवार को दून पुस्तकालय के एम्फी थिएटर में बैठक आयोजित की गई। बैठक में आयोजन समिति का गठन किया गया और मेले की विभिन्न गतिविधियों को लेकर चर्चा की गई। आयोजन के संयोजक हेम पंत ने बताया कि क्रिएटिव उत्तराखंड की ओर से इससे पहले उत्तराखंड के कई शहरों और कस्बों में 15 किताब कौतिक आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें टनकपुर, बैजनाथ, चंपावत, पिथौरागढ़, द्वाराहाट, भीमताल, नानकमत्ता, रानीखेत, नई टिहरी, पंतनगर, गैरसैंण और डीडीहाट समेत कई स्थान शामिल हैं।
हेम पंत ने कहा कि किताब कौतिक का उद्देश्य केवल बड़ी संख्या में किताबों को एक स्थान पर उपलब्ध कराना नहीं है। इसके पीछे युवाओं और बच्चों में पढ़ने की संस्कृति विकसित करना, उनकी जिज्ञासा को बढ़ाना तथा रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करना भी है। आयोजन के दौरान पुस्तक प्रेमियों को साहित्य, शिक्षा, करियर और संस्कृति से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
तीन दिवसीय आयोजन में साहित्यिक परिचर्चा, लेखकों से सीधी बातचीत, काव्य गोष्ठी, करियर काउंसिलिंग और सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा बच्चों और युवाओं को ध्यान में रखते हुए विज्ञान एवं एआइ कॉर्नर भी बनाया जाएगा। नेचर वॉक, साहसिक खेल, पपेट निर्माण, भाषा एवं संस्कृति तथा वॉल पेंटिंग जैसी कार्यशालाएं भी आयोजित होंगी। मेले में हस्तशिल्प से जुड़े स्टॉल लगाए जाएंगे, जबकि स्कूली बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करेंगे।
बच्चे लिखेंगे और खुद बनाएंगे अपनी किताब
किताब कौतिक से पहले स्कूली बच्चों के लिए पांच दिवसीय ‘बालप्रहरी बाल लेखन कार्यशाला’ आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला में बच्चे स्वयं अपनी हस्तलिखित पुस्तकें तैयार करेंगे। खास बात यह होगी कि बच्चों द्वारा तैयार की गई इन पुस्तकों को मेले में स्टॉल लगाकर प्रदर्शित किया जाएगा। इससे बच्चों को लेखन के साथ-साथ अपनी रचनाओं को पाठकों के सामने प्रस्तुत करने का भी अवसर मिलेगा।
आयोजन में देशभर से साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता और रंगकर्मी भी शामिल होंगे। इससे देहरादून के पाठकों और युवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे रचनाकारों और विचारकों से संवाद करने का अवसर मिलेगा।
तैयारी बैठक में हेम पंत के साथ दयाल पांडे, भारती पांडे, प्रवीन कुमार भट्ट, रमाकांत बेंजवाल, बीना बेंजवाल, हेमा तिवारी, देवेश जोशी, प्रेम पंचोली, मनोज पांडे, दीप्ति भट्ट और प्रो. शशि समेत साहित्यकार, शिक्षक, शोधार्थी, रंगकर्मी और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
आयोजकों के अनुसार, किताब कौतिक का प्रयास किताबों को पाठकों तक पहुंचाने के साथ-साथ पढ़ने को एक सामूहिक और रचनात्मक अनुभव बनाना है। देहरादून में होने वाला यह आयोजन बच्चों, युवाओं और पुस्तक प्रेमियों के लिए साहित्य और ज्ञान की दुनिया से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच बनने की उम्मीद है।


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