सरकार का उद्देश्य नशे के कारोबार से जुड़े लोगों तक पहुंचने के लिए आम नागरिकों को भी अभियान से जोड़ना है। इसके लिए लोगों से नशा तस्करी से संबंधित जानकारी पुलिस और संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने की अपील की जा रही है। सरकार के अनुसार, नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी भी जरूरी है।
तस्करी के नेटवर्क पर एएनटीएफ की नजर
ड्रग फ्री उत्तराखंड अभियान के तहत एएनटीएफ प्रदेश में नशे की तस्करी और उससे जुड़े नेटवर्क पर नजर रख रही है। अधिकारियों की ओर से नशे के कारोबार से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जा रही है। विशेष रूप से ऐसे नेटवर्क को चिन्हित करने पर जोर दिया जा रहा है, जिनका संपर्क उत्तराखंड के बाहर के राज्यों से भी हो सकता है।
सरकार की ओर से नागरिकों से अपील की गई है कि यदि उन्हें नशे की तस्करी या उससे संबंधित गतिविधियों की जानकारी मिलती है तो वे उसे संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाएं। इसके लिए नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 पर सूचना देने को कहा गया है। सरकार का मानना है कि समय पर मिली सूचना से तस्करी के नेटवर्क तक पहुंचने और कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
युवाओं को नशे से दूर रखने पर जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नशामुक्त भारत अभियान से प्रेरणा लेते हुए राज्य सरकार उत्तराखंड को नशामुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की रणनीति में नशे की तस्करी रोकने के साथ-साथ नशे की लत से प्रभावित लोगों को मुख्यधारा में वापस लाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
नशे के आदी युवाओं के लिए पुनर्वास केंद्रों की स्थापना और काउंसलिंग की व्यवस्था की गई है। सरकार के अनुसार, नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को उपचार और परामर्श उपलब्ध कराने के लिए काउंसलर की तैनाती भी की गई है। इसका उद्देश्य प्रभावित युवाओं को नशे से बाहर निकालकर सामान्य जीवन की ओर वापस लाना है।
स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान
नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान स्कूलों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों तक भी पहुंचाया जा रहा है। युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देकर इससे दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया गया है।
गलत संगति या नशे की ओर बढ़ रहे छात्रों की समय रहते पहचान करने, उन्हें परामर्श देने और जरूरत पड़ने पर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने के लिए परिवार, शिक्षण संस्थानों और प्रशासन के बीच समन्वय आवश्यक है।
नशा तस्करों की सूचना पर 20 हजार से 2.40 लाख रुपये तक इनाम देने की योजना इसी व्यापक अभियान का हिस्सा है। सरकार की अपील है कि नागरिक नशे से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी साझा करें और अभियान में सहयोग दें।


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