ज्योलीकोट में दूषित पेयजल आपूर्ति का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। पेयजल की गुणवत्ता सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होने के कारण सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया। जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने के बाद जल संस्थान और पेयजल निगम से जुड़े छह वरिष्ठ अभियंताओं के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। सरकार की ओर से इसे जन स्वास्थ्य से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
जन स्वास्थ्य के मामले में सख्त रुख
सरकार की ओर से कहा गया है कि आमजन के स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने और शिकायतों के त्वरित समाधान पर जोर दिया जाता रहा है। इसी क्रम में ज्योलीकोट प्रकरण में संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।
सीएम हेल्पलाइन 1905 की लगातार समीक्षा को भी जन समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। सरकार के अनुसार, हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की निगरानी और विभागों की जवाबदेही तय होने से शिकायतों के निस्तारण को लेकर सक्रियता बढ़ी है। ज्योलीकोट में पेयजल से जुड़े मामले में भी कार्रवाई को इसी व्यवस्था के तहत त्वरित कदम के रूप में देखा जा रहा है।
भूमि मामलों में भी कार्रवाई का दावा
सरकार के अनुसार, प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कार्रवाई का सिलसिला पहले से जारी है। भूमि खरीद में अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के मामलों में भी कार्रवाई की गई है। सरकार का कहना है कि अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चलाकर अब तक लगभग 10 हजार एकड़ सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।
सरकार ने सुशासन और जन समस्याओं के त्वरित समाधान को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। प्रशासनिक अधिकारियों और विभागीय जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
NEET-UG फर्जी प्रमाणपत्र मामले में आठ पर कार्रवाई
नीट-यूजी 2026 की राज्य केंद्रीयकृत काउंसलिंग के दौरान फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश लेने का मामला भी सरकार के संज्ञान में आया था। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। अब तक आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं। साथ ही, फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर संबंधित अभ्यर्थियों की प्रवेश प्रक्रिया भी रद्द कर दी गई है।
सरकार का कहना है कि शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ज्योलीकोट में दूषित पानी के मामले में छह अभियंताओं का निलंबन और नीट-यूजी प्रकरण में आठ अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही और नियमों के अनुपालन से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों मामलों में जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई भी हो सकती है।


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