बताया गया कि बुधवार शाम नैनीताल शहर में मूसलधार बारिश के साथ तेज आंधी-तूफान आया था। इसके चलते कई क्षेत्रों में बिजली गुल हो गई थी। आशंका है कि कार्यालय में कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चालू रह गया होगा। रात में बिजली आपूर्ति बहाल होने के बाद शॉर्ट सर्किट हुआ और बंद कार्यालय के भीतर आग सुलग उठी। आबादी वाले क्षेत्र से कार्यालय भवन दूर होने के कारण रात में आग लगने की जानकारी किसी को नहीं हो सकी।
घंटों तक कार्यालय के भीतर दस्तावेज सुलगते रहे। सुबह करीब 8:30 बजे चिड़ियाघर और कार्यालय क्षेत्र में गश्त के दौरान रात्रि चौकीदार तथा सफाई कर्मचारी वहां पहुंचे। उन्होंने भवन के अंदर से धुआं उठता देखा। इसके बाद तत्काल विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को सूचना दी गई। जानकारी मिलते ही चिड़ियाघर का स्टाफ और अन्य वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया।
कार्यालय में उपलब्ध अग्निशमन उपकरणों की मदद से आग को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया। इसके चलते आग भवन के अन्य कमरों तक फैलने से बच गई। बाद में दमकल विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और आग को पूरी तरह बुझाने की कार्रवाई की। समय रहते आग पर नियंत्रण होने से भवन के बड़े हिस्से को नुकसान से बचा लिया गया।
डीएफओ आकाश गंगवार ने बताया कि आग से भवन के निचले तल पर स्थित दो कमरों में रखे काफी दस्तावेज जल गए हैं। कार्यालय में लैंड ट्रांसफर अनुभाग संचालित होता था। इन कमरों में पिछले कई वर्षों के वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े रिकॉर्ड सहित अन्य महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज सुरक्षित रखे गए थे।
डीएफओ के अनुसार विभागीय डिवीजन कार्यालय कई बार अलग-अलग स्थानों पर स्थानांतरित हुआ है। इस कारण पुराने दस्तावेजों का एक हिस्सा दूसरे स्थानों पर भी सुरक्षित रखा गया था। हालांकि, करीब 15 वर्षों से संबंधित कई रिकॉर्ड इस भवन में मौजूद थे। आग से हुए वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा रहा है। साथ ही आग लगने के कारणों की भी जांच की जाएगी।




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