पिछले वर्ष प्रदेश में 214 क्रय केंद्रों के माध्यम से मंडुवा खरीदा गया था। इस बार 36 अतिरिक्त केंद्र खोले जा रहे हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे।
गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ के माध्यम से किसानों से सीधे खरीद की जाएगी। मंडुवा का खरीद मूल्य इस बार 52.05 रुपये प्रति किलो तय किया गया है। पिछले वर्ष मंडुवा 48.86 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा गया था। सरकार के अनुसार, मंडुवा की खरीद पहले 18 रुपये प्रति किलो की दर से शुरू हुई थी, जो अब बढ़कर 52.05 रुपये प्रति किलो हो गई है।
सहकारी समितियों के माध्यम से सीधे खरीद होने से किसानों को उपज बेचने के लिए दूर के बाजारों में जाने की जरूरत नहीं होगी। प्रत्येक क्विंटल की खरीद पर संबंधित सहकारी समिति को 200 रुपये की आय भी प्राप्त होगी।
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करना और उनकी आय बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों से सीधे उपज खरीदी जा रही है। उनके अनुसार, मंडुवा का खरीद मूल्य 18 रुपये से बढ़कर 52.05 रुपये प्रति किलो होना किसानों को बेहतर मूल्य देने की दिशा में उठाया गया कदम है।
डॉ. रावत ने कहा कि मिलेट्स की खेती से पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक कृषि को नई मजबूती मिल रही है। इससे किसान पारंपरिक और जैविक खेती की ओर फिर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक स्टेट बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना चाहती है।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि महिलाएं विभिन्न योजनाओं से लखपति दीदी बन रही हैं, वहीं किसान मिलेट्स और पारंपरिक पहाड़ी उत्पादों से आय बढ़ा रहे हैं।
सचिव सहकारिता डॉ. इकबाल अहमद ने बताया कि मिलेट्स खरीद और इसके प्रचार-प्रसार के संबंध में सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारियों से कहा गया है कि किसानों तक क्रय केंद्रों और निर्धारित खरीद मूल्य की जानकारी व्यापक स्तर पर पहुंचाई जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान योजना का लाभ ले सकें। किसानों को भुगतान सीधे डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में किया जाएगा।
उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ल ने बताया कि इस वर्ष 250 क्रय केंद्रों पर मिलेट्स की खरीद होगी। पिछले वर्ष 214 केंद्रों के मुकाबले इस बार 36 केंद्र बढ़ाए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक जिले में यूसीएफ हाट के माध्यम से किसानों के उत्पादों की खरीद और विपणन को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
शुक्ल के अनुसार, मंडुवा की खरीद 52.05 रुपये प्रति किलो की निर्धारित दर पर होगी। सोयाबीन, दाल, झंगोरा, चौलाई तथा अन्य सूखे अनाज और पहाड़ी उत्पाद बाजार मूल्य के आधार पर खरीदे जाएंगे। यूसीएफ हाट के माध्यम से खरीदे गए उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बेहतर विपणन किया जाएगा, जिससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सके।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 214 क्रय केंद्रों से 11,153 किसानों से कुल 53,860.652 कुंतल मंडुवा खरीदा गया था। पिछले वर्ष चमोली में सर्वाधिक मंडुवा खरीद दर्ज की गई थी, जबकि कुमाऊं मंडल में पिथौरागढ़ सबसे आगे रहा।
सरकार को उम्मीद है कि क्रय केंद्रों के विस्तार, बेहतर खरीद मूल्य, डीबीटी से भुगतान और यूसीएफ हाट के जरिए ब्रांडिंग से उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को बाजार मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।


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