उत्तराखंड में जनगणना का काम देश के अन्य राज्यों की तुलना में पहले कराया जा रहा है। केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब और गोवा में विधानसभा चुनावों को देखते हुए जनगणना की तारीख पहले निर्धारित की है। इन राज्यों में 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक जनसंख्या गणना होगी। इसके बाद 5 से 9 जनवरी तक पुनरीक्षण दौर चलेगा। इस दौरान प्रगणक घर-घर जाकर दर्ज जानकारी में आवश्यक सुधार करेंगे।
प्रदेश में जनगणना के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का काम 25 अप्रैल से 24 मई 2026 के बीच पूरा हो चुका है। इसके आधार पर राज्य में परिवारों की संख्या 28.3 लाख से अधिक और आवासीय व गैर-आवासीय मकानों की संख्या करीब 45 लाख सामने आई है। वर्ष 2011 की जनगणना में उत्तराखंड की आबादी करीब 1.01 करोड़ थी, जबकि अब अनुमानित आबादी 1.27 करोड़ से अधिक बताई गई है।
जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, इस बार जनसंख्या गणना के लिए करीब 10 से 20 प्रतिशत तक नए सेंसस ब्लॉक बढ़ सकते हैं। इसके साथ ही कर्मचारियों की संख्या में भी इसी अनुपात में वृद्धि की संभावना है। मकान सूचीकरण के दौरान करीब 20 हजार प्रगणक और 3,500 सुपरवाइजर तैनात किए गए थे। अब जनसंख्या गणना के दौरान रिजर्व कर्मचारियों सहित करीब 35 हजार कर्मचारियों की तैनाती होने की उम्मीद है।
इस बार प्रगणकों को एक परिवार की गणना में करीब 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लग सकता है। जनगणना में पूछे जाने वाले सवालों की संख्या 33 से बढ़ाकर 40 कर दी गई है। सामान्य परिवारों के साथ संस्थागत परिवारों और बेघर आबादी को भी गणना में शामिल किया जाएगा। सैन्य एवं अर्धसैनिक बलों के जवानों की गणना के लिए अलग व्यवस्था रहेगी।
जनगणना के दौरान व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, राष्ट्रीयता, धर्म, अनुसूचित जाति-जनजाति संबंधी जानकारी, माता-पिता का विवरण, दिव्यांगता, मातृभाषा और शिक्षा से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। इसके अलावा रोजगार, व्यवसाय, आय संबंधी आर्थिक गतिविधि, जन्म स्थान, प्रवास, स्थायी पता और बच्चों से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी।
इस बार कुछ डिजिटल और पहचान संबंधी जानकारियां भी ली जाएंगी। इनमें डिजिटल साक्षरता, बैंक खातों की संख्या, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी जानकारियां शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन विवरणों को जनगणना प्रक्रिया के तहत दर्ज किया जाएगा।
सैन्य और अर्धसैनिक बलों के लिए अलग प्रोटोकॉल निर्धारित है। बीआरओ, आईटीबीपी, एसएसबी समेत अन्य संगठनों के राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी बनाए जाएंगे। संबंधित संगठन अपने प्रगणक और सुपरवाइजर नियुक्त करेंगे। उन्हें जनगणना निदेशालय की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। सैन्यकर्मियों की गणना ऑफलाइन माध्यम से की जाएगी और बाद में सुरक्षित तरीके से आंकड़े पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।
उत्तराखंड के हिम आच्छादित क्षेत्रों में जनगणना का कार्य पहले ही 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलाया गया है। अब प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में मुख्य चरण की तैयारियां पूरी की जा रही हैं। 15 से 20 अक्टूबर के बीच प्रगणकों और सुपरवाइजरों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी गई है। इस तरह दिसंबर से शुरू होने वाली जनगणना के लिए प्रशासनिक और मैदानी स्तर पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।


Leave a comment