Home स्वरोजगार उत्तराखंड के पहाड़ों से आपके घर तक पहुंचा याकुलास का भरोसा
स्वरोजगार

उत्तराखंड के पहाड़ों से आपके घर तक पहुंचा याकुलास का भरोसा

आज जब लोग अपनी सेहत, खानपान और परिवार के लिए बेहतर विकल्प तलाश रहे हैं, ऐसे में उत्तराखंड की पारंपरिक उपज और मिलेट्स एक शानदार विकल्प बनकर सामने आ रहे हैं। याकुलास (YAKULAAS) इसी सोच के साथ उत्तराखंड के खेतों से गुणवत्तापूर्ण मिलेट्स और दालों को सीधे आपके घर तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। इसका उद्देश्य केवल उत्पाद बेचना नहीं, बल्कि स्थानीय किसानों, पहाड़ी कृषि और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना भी है।

 

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लंबे समय से किसान, खासकर महिलाएं, मंडुआ, झंगोरा, दालों और दूसरी पारंपरिक फसलों के उत्पादन से जुड़ी रही हैं। लेकिन इन किसानों को अपनी उपज का उचित बाजार और सही मूल्य मिलना हमेशा आसान नहीं रहा। पहले गांवों में बिचौलियों के जरिए किसानों से अनाज और दालें ली जाती थीं और कई जगह इसके बदले नमक या गुड़ जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें दी जाती थीं। समय के साथ यह व्यवस्था बदली और अब किसानों को उनकी उपज के बदले पैसे मिलते हैं, लेकिन कई बार यह भुगतान न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP के अनुरूप नहीं होता।

यहीं याकुलास एक अलग सोच के साथ आगे बढ़ना चाहता है। ब्रांड का उद्देश्य किसानों और उपभोक्ताओं के बीच मौजूद बिचौलियों की कड़ी को कम करना और उत्तराखंड के किसानों, विशेष रूप से महिला किसानों, को उनकी मेहनत का बेहतर लाभ दिलाने की दिशा में काम करना है। खेत से सीधे बाजार और ग्राहक तक पहुंच बनाने से स्थानीय उत्पादों को नया बाजार मिल सकता है और किसानों की आय बढ़ाने के अवसर भी तैयार हो सकते हैं।

याकुलास की खासियत इसकी उत्तराखंडी पहचान है। पहाड़ों में उगाए जाने वाले पारंपरिक अनाज लंबे समय से स्थानीय खानपान का हिस्सा रहे हैं। आज इन्हीं पौष्टिक और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को आधुनिक पैकेजिंग और सुविधाजनक ऑनलाइन खरीदारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। मंडुआ यानी फिंगर मिलेट के साथ विभिन्न मिलेट्स और दालों को घर बैठे मंगाने की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

याकुलास का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि गढ़वाल में रोजगार के अवसर पैदा करना भी है। हर साल बेहतर रोजगार और सुविधाओं की तलाश में पहाड़ों से बड़ी संख्या में लोग शहरों की ओर पलायन करते हैं। अगर स्थानीय कृषि, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बिक्री से जुड़े रोजगार गांव और आसपास के क्षेत्रों में विकसित हों, तो युवाओं और स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र में ही काम के अवसर मिल सकते हैं। याकुलास इसी दिशा में एक ऐसा मॉडल विकसित करने की सोच रखता है, जिसमें किसान, स्थानीय महिलाएं और युवा सीधे जुड़ सकें।

मिलेट्स को रोजमर्रा के भोजन में शामिल करना आज की बदलती जीवनशैली में एक उपयोगी विकल्प हो सकता है। मंडुआ से रोटी, डोसा, चीला, हलवा और कई अन्य व्यंजन बनाए जा सकते हैं। वहीं दालें भारतीय भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। याकुलास इन पारंपरिक खाद्य पदार्थों को आसान ऑनलाइन खरीदारी के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचाने पर जोर देता है।

याकुलास का प्रयास उत्तराखंड की समृद्ध कृषि विरासत को नए बाजार, नई पीढ़ी और बेहतर आजीविका के अवसरों से जोड़ने की दिशा में है। पहाड़ के खेतों से सीधे आपके घर तक पहुंचने वाला हर उत्पाद स्थानीय किसान और उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक कहानी भी अपने साथ लेकर आता है।

अगर आप अपने रसोईघर में पहाड़ों के पारंपरिक स्वाद को शामिल करना चाहते हैं और स्थानीय किसानों से जुड़ना चाहते हैं, तो याकुलास को एक्सप्लोर कर सकते हैं। https://www.yakulaas.com मिलेट्स और दालों की खरीदारी के साथ उत्तराखंड के किसानों, महिला कृषकों और पहाड़ में रोजगार के नए अवसरों की इस यात्रा का हिस्सा बनें। स्वाद, परंपरा, किसान और पहाड़, याकुलास के साथ इन सभी को अपने भोजन से जोड़ें।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

26 साल बाद गांव लौटे संजीव, ‘मांजी मसाले’ से खड़ा किया रोजगार का कारोबार

रोजगार की तलाश में पहाड़ से शहरों की ओर पलायन की कहानियां...