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सूरज से निकलेगी रोजगार की नई रोशनी, सौर संयंत्र पर मिलेगा 50 प्रतिशत अनुदान

पहाड़ के गांवों में रोजगार के सीमित अवसरों के बीच सौर ऊर्जा अब युवाओं के लिए स्वरोजगार का नया माध्यम बन रही है। बागेश्वर जिले के ओलखसों गांव में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 200 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। करीब एक करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से गांव में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

 

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत स्थापित होने वाली परियोजनाओं पर सरकार की ओर से परियोजना लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। ऐसे में युवाओं और अन्य इच्छुक लाभार्थियों के लिए सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश कर नियमित आय का जरिया तैयार करने की संभावना बढ़ रही है। ओलखसों में प्रस्तावित संयंत्र को भी इसी योजना का लाभ मिलेगा।

ऑनलाइन आवेदन से शुरू होती है प्रक्रिया

योजना का लाभ लेने के लिए जिले में उरेडा कार्यालय के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन प्राप्त होने के बाद उरेडा की ओर से तकनीकी जांच के लिए इसे ऊर्जा निगम को भेजा जाता है। ऊर्जा निगम की संस्तुति मिलने के बाद पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर उरेडा द्वारा परियोजना को स्वीकृति दी जाती है।

स्वीकृति पत्र मिलने के बाद लाभार्थी बैंक से ऋण के लिए संपर्क करता है। ऋण स्वीकृत होने पर ऊर्जा निगम के साथ एमओयू किया जाता है। बैंक से धनराशि मिलने के बाद सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने वाली पंजीकृत कंपनी के साथ करार किया जाता है। इसके बाद लीज अथवा नाप भूमि का रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकरण कराने की प्रक्रिया पूरी की जाती है और संयंत्र स्थापित किया जाता है। परियोजना लागत पर सरकार की ओर से 50 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।

जिले में आठ सौर परियोजनाएं संचालित

बागेश्वर जिले में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत अब तक आठ सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित हो चुकी हैं। इनमें 250 किलोवाट क्षमता का एक, 200 किलोवाट के पांच, 100 किलोवाट का एक और 25 किलोवाट क्षमता का एक संयंत्र शामिल है। इन परियोजनाओं से वर्तमान में करीब 5600 यूनिट बिजली प्रतिदिन उत्पादित की जा रही है।

उत्पादित बिजली को उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) 4.64 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीद रहा है। बिजली खरीद का करार 25 वर्ष के लिए किया गया है। इससे परियोजना संचालकों को लंबे समय तक आय का अवसर मिल रहा है।

प्रशासन का कहना है कि सौर ऊर्जा परियोजनाएं पहाड़ में केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं के लिए दीर्घकालिक स्वरोजगार और आय का साधन भी बन रही हैं। जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे के अनुसार, जिले में अधिक से अधिक युवाओं को मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना का लाभ दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विस्तार से जिले को ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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