सेब महोत्सव में किसान उत्पादक संगठनों द्वारा सेब की विभिन्न प्रजातियों के साथ कीवी, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। मुख्य सचिव ने सभी उत्पादों का अवलोकन किया और एफपीओ प्रतिनिधियों से उत्पादन, विपणन, बाजार की उपलब्धता तथा उनके सामने आ रही चुनौतियों के बारे में बातचीत की।
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों की भूमिका केवल किसानों को एक मंच पर जोड़ने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। एफपीओ को मजबूत, आत्मनिर्भर और लंबे समय तक टिकाऊ संस्थाओं के रूप में विकसित करना जरूरी है। इसके लिए उन्हें लगातार मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और क्षमता विकास के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि एफपीओ के मजबूत होने से किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मिल सकता है। सामूहिक रूप से उत्पादन और विपणन करने से किसानों की सौदेबाजी की क्षमता बढ़ेगी और उन्हें बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं से कहा कि किसान उत्पादक संगठनों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उनकी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका लाभ किसानों और एफपीओ तक प्रभावी तरीके से पहुंचना चाहिए।
उत्तराखंड में सेब और अन्य फल-सब्जियों की खेती को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान बागवानी से जुड़े हैं। ऐसे में एफपीओ के माध्यम से किसानों को एकजुट कर उनके उत्पादों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया जा सकता है।
सेब महोत्सव 3.0 जैसे आयोजनों से किसानों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और संभावित बाजारों से जुड़ने का अवसर भी मिलता है। इससे स्थानीय कृषि उत्पादों की पहचान मजबूत करने में मदद मिल सकती है। कार्यक्रम में किसानों और एफपीओ प्रतिनिधियों ने उत्पादन से लेकर विपणन तक की अपनी चुनौतियां मुख्य सचिव के सामने रखीं।
मुख्य सचिव ने कहा कि कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए किसान, एफपीओ, सरकारी विभाग और वित्तीय संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सामूहिक प्रयासों से उत्तराखंड के कृषि और बागवानी उत्पादों को व्यापक बाजार मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने के अवसर भी मजबूत होंगे।




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