परियोजना का मुख्य उद्देश्य गैरसैंण नगर और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाली आबादी को दीर्घकालिक और नियमित पेयजल सुविधा उपलब्ध कराना है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए बजट की व्यवस्था की गई है। शुरुआती धनराशि राज्य आकस्मिकता निधि से उपलब्ध कराई जाएगी। बाद में केंद्र सरकार की एसएएससीआई योजना के तहत धनराशि प्राप्त होने पर इसका समायोजन किया जाएगा।
2055 तक 32 हजार लोगों को मिलेगा लाभ
सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता सुभाष पांडे के अनुसार, रामगंगा नदी पर 35 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाएगा। इसके निर्माण से वर्ष 2055 तक लगभग 32 हजार लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 135 लीटर पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। बांध के निर्माण से तीन लाख घन मीटर जल भंडारण क्षमता विकसित होगी। इससे क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
निर्माण से पहले होगी तकनीकी जांच
शासन ने परियोजना की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। बांध और बैराज के संरचनात्मक डिजाइन तथा ड्राइंग को मान्यता प्राप्त संस्था से जांच और सत्यापन कराने के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा। निर्माण शुरू होने से पहले संबंधित स्थल का निरीक्षण, मृदा परीक्षण और भूगर्भीय उपयुक्तता की जांच भी कराई जाएगी। इसके अलावा निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से परीक्षण और तृतीय पक्ष गुणवत्ता जांच अनिवार्य की गई है।
प्रभावित गांवों को भी मिलेगा पानी
परियोजना के दौरान और निर्माण पूरा होने के बाद बांध के निचले हिस्से यानी डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में स्थित प्रभावित गांवों को निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। नदी के जल स्रोत में न्यूनतम आवश्यक पानी बनाए रखना भी सुनिश्चित करना होगा।
वित्तीय पारदर्शिता के लिए स्वीकृत बजट से बची धनराशि शासन को लौटानी होगी। अतिरिक्त कार्य कराने के लिए सक्षम स्तर से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। परियोजना की प्रगति की जानकारी शासन को देने के साथ इसे पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा। स्वीकृत धनराशि का उपयोग 31 मार्च 2027 तक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सरकार के अनुसार, इस परियोजना से पर्वतीय क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूती मिलेगी और गैरसैंण व आसपास की आबादी को भविष्य में पेयजल संकट से राहत मिलने की उम्मीद है।




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