एक हजार से अधिक श्रद्धालु बने कपाट बंद होने के साक्षी
रुद्रनाथ धाम में कपाट बंद होने के उत्सव को यादगार बनाने के लिए एक हजार से अधिक श्रद्धालु और हक-हकूकधारी मौजूद रहे। इससे पहले पुजारी और हक-हकूकधारी बुग्याली क्षेत्र से बुके (बुकले) के फूल लेकर धाम पहुंचे। इन पारंपरिक फूलों से बाबा का शृंगार किया गया। कपाट बंद करने की धार्मिक प्रक्रिया शनिवार शाम पांच बजे शुरू हुई।
कार्तिक संक्रांति के अवसर पर सूर्य के तुला राशि में प्रवेश के साथ मुख्य पुजारी पंडित हरीश भट्ट ने बाबा रुद्रनाथ को भोग अर्पित किया। इसके बाद भगवान का बुके के फूलों से शृंगार किया गया और धार्मिक परंपराओं के अनुसार उन्हें शीतकाल के लिए समाधि दी गई। इस दौरान मनोज नेगी, पंकज नेगी, राम सिंह राणा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
19 अक्टूबर को गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी डोली
कपाट बंद होने के बाद बाबा रुद्रनाथ की उत्सव डोली रविवार सुबह धाम से गोपेश्वर के लिए रवाना होगी। यात्रा के दौरान डोली रात्रि विश्राम के लिए ग्वाड़ देवलधार पहुंचेगी। इसके बाद 19 अक्टूबर को डोली गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी। यहां अगले छह माह तक बाबा की पूजा-अर्चना शीतकालीन परंपराओं के अनुसार संपन्न होगी।
रुद्रनाथ धाम उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां भगवान शिव के मुख के दर्शन होते हैं और बाबा प्राकृतिक गुफा में विराजमान हैं। समुद्रतल से 11,808 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस धाम तक पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए कठिन यात्रा का अनुभव होता है। यहां दर्शन करने के लिए लगभग 19 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई तय करनी पड़ती है।
हर वर्ष कपाट बंद होने के साथ ही बाबा रुद्रनाथ की शीतकालीन पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। अब श्रद्धालु गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन कर सकेंगे। कपाट बंद होने का यह आयोजन धार्मिक आस्था, स्थानीय परंपराओं और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है।




Leave a comment