लंबे इंतजार के बाद मिलने जा रही धरोहर

लंबे इंतजार के बाद मिलने जा रही धरोहर

डोबरा-चांटी पुल के बनने से 3 लाख से ज़्यादा की आबादी को जिला मुख्यालय तक आने के लिए 100 किलोमीटर की लंबी दूरी नहीं नापनी पड़ेगी। हिल-मेल ब्यूरो, टिहरी उत्तराखंड के टिहरी जिले के तीन लाख से ज्यादा लोगों को 14 साल के लंबे इंतजार

डोबरा-चांटी पुल के बनने से 3 लाख से ज़्यादा की आबादी को जिला मुख्यालय तक आने के लिए 100 किलोमीटर की लंबी दूरी नहीं नापनी पड़ेगी।

हिल-मेल ब्यूरो, टिहरी

उत्तराखंड के टिहरी जिले के तीन लाख से ज्यादा लोगों को 14 साल के लंबे इंतजार के बाद एक धरोहर मिलने जा रही है। टिहरी के प्रतापनगर क्षेत्र को सड़क मार्ग से जोड़ने वाला देश का सबसे लंबा झूला पुल जल्द ही शुरू हो जाएगा। विशाल टिहरी झील के ऊपर 725 मीटर लंबे इंजीनियरिंग के इस शाहकार का विहंगम नजारा देखते ही बनता है। यह पुल भारत, दक्षिण कोरिया और चीन के इंजीनियरों के हुनर की देन है। देखने से ही लगता है कि इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारना आसान काम नहीं था। पुल के टावर की ऊंचाई कुतुबमीनार से महज 34 फीट कम है। इतनी ऊंचाई से इस पुल को बनाने में इंजीनियरों ने अपना समूचा ज्ञान और अनुभव झोंक दिया। ये वही डोबरा-चांठी पुल है जो कभी खराब इंजीनियरिंग और कथित भ्रष्टाचार के लिए देशभर में बदनाम रहा। इस परियोजना को सबसे पहले 17 अप्रैल 2006 को मंजूरी मिली। टिहरी बांध पुनर्वास निदेशालय को इसका जिम्मा सौंपा गया। पुल निर्माण के लिए करीब 89 करोड़ रुपये मंजूर हुए। फिर आठ दिसंबर 2008 को लागत बढ़ाकर 128.53 करोड़ रुपये कर दी गई। उस समय इस मोटर झूला पुल की लंबाई 532 मीटर प्रस्तावित थी। अब निर्माणाधीन डोबरा-चांटी पुल की कुल लंबाई 725 मीटर है,  जिसमें 440 मीटर सस्पेंशन ब्रिज हैं तथा 260 मीटर आरसीसी डोबरा साइड एवं 25 मीटर स्टील गार्टर चांटी साइड है।

दिन में लंबा तो रात को छोटा हो जाएगा पुल

देश के सबसे लंबे सस्पेंशन डोबरा-चांटी पुल पर अगले साल से वाहन फर्राटा भरते नजर आएंगे। 440 मीटर लंबे स्पान वाले इस पुल की विशेषता तापमान के हिसाब से इसका हर दिन फैलना-सिकुड़ना है। पुल 90 सेंटीमीटर तक दोनों कोनों में फैलेगा और सिकुड़ेगा भी। लोक निर्माण विभाग के अनुसार, तापमान के हिसाब से पुल पर होने वाली हलचल के लिए सुरक्षा उपाय भी किए जा रहे हैं। पुल के दोनों सिरों पर मॉड्यूलर एक्सपेंशन ज्वाइंट लगाए जाएंगे, जो पुल के इधर-उधर होने पर उसे सुरक्षा देंगे। डोबरा में हवा की रफ्तार भी तेज होती है। खासकर गर्मियों में यहां पर 70 से सौ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलती है। जिसे सहने के लिए पुल पर आठ शॉक ऑब्जर्वर लगाए जाएंगे। हालांकि, पुल की क्षमता 150 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवा को सहने की है। इसके अलावा पुल को कसने के लिए दो लाख से ज्यादा नट-बोल्ट भी लगाए जाएंगे। मार्च 2020 तक पुल पर आवागमन शुरू हो जाएगा।

100 किलोमीटर लंबा सफर अब होगा खत्म

यह पुल उत्तराखंड के टिहरी जिला मुख्यालय को प्रताप नगर ब्लॉक से जोड़ेगा। टिहरी जिले में टिहरी बांध बनने के बाद लगभग 40 किलोमीटर बड़ी जो झील बनी उसमें इस इलाके को जोड़ने वाले तमाम पुल और रास्ते झील के पानी में डूब गए, जिसके बाद से यह पुल बनाने की मांग की जा रही थी। लेकिन साल 2006 से बन रहा ये पुल अलग-अलग कारणों नहीं बन पाया और 14 साल से ज्यादा हो गए। यह पुल अपने आप में बेहद खास है क्योंकि यह भारत का एकमात्र मोटरेबल झूला पुल है जिसकी लंबाई 440 मीटर के लगभग है इससे बड़ा झूला पुल देश में नहीं है अब यह उम्मीद जगी है कि अगले साल तक मार्च महीने में यह पुल पूरा हो जाएगा। झील के ऊपर 850 मीटर की ऊंचाई पर मुख्य पुल को जोड़ने के लिए 24 रोप को आर-पार करवाना सबसे बड़ी चुनौती थी। ये काम 5 महीने में पूरा हो पाया। पुल के बनने से 3 लाख से ज्यादा की आबादी को जिला मुख्यालय तक आने के लिए 100 किलोमीटर की लंबी दूरी नहीं नापनी पड़ेगी। पुल के लिए 20-20 टन के 24 रोप लग गए। 5-5 मीटर के फासले पर झील की तरफ क्लैंप, सस्पेंडर का काम भी पूरा हो गया। डोबरा की तरफ 260 मीटर की आरसीसी और चांठी की तरफ 25 मीटर एप्रोच पुल का काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही 58-58 मीटर के चार टॉवर भी यहां तैयार किए गए हैं। अच्छी बात ये भी है कि यहां 700 मीटर कैटवॉक का काम भी खत्म हो गया है। आईआईटी रुड़की और आईआईटी कानपुर द्वारा डोबरा-चांटी का डिजाइन बनाया गया था। इसके बाद विदेशी कंसल्टेंट की मदद से इस पुल पर निर्माण कार्य शुरू किया  गया।

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