हिल मेल ब्यूरो, देहरादून
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को सचिवालय में ई-कैबिनेट की शुरुआत की। इसका उद्देश्य पेपर पर निर्भरता को खत्म करना, समयबद्ध कार्रवाई के साथ ही संस्थागत मेमरी को विकसित करना है। आपको बता दें कि ई-कैबिनेट सिस्टम शुरू होने से कागज की भारी बचत होगी और इससे पर्यावरण को फायदा होगा। यह कदम ई-गवर्नेंस और पारदर्शिता की दिशा में भी अहम है। अब भविष्य में जो भी कैबिनेट की बैठकें होंगी, वे सभी पेपरलेस होंगी।
इसका मतलब यह हुआ कि कागज की जगह प्रस्ताव, मंजूरी, चर्चा सबकुछ ऑनलाइन होगा। विभाग ने ई-कैबिनेट का पोर्टल भी तैयार कर लिया है। आगामी बैठकों के बारे में सूचनाएं जैसे स्थान, समय आदि ईमेल के जरिए कैबिनेट मंत्रियों को सूचित किया जाएगा।
इस सिस्टम के तहत सभी यूजर्स के पास एक ई-अकाउंट होगा। सभी की लॉगइन आईडी अलग-अलग होगी। बैठक की जानकारी जैसे फैसले आदि कुछ ही देर में ऑनलाइन अपलोड कर दिए जाएंगे और राज्य ही नहीं देश, विदेश का कोई भी व्यक्ति इसे देख सकेगा।
ई गवर्नेंस की ओर एक मजबूत कदम बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने ई-कैबिनेट की शुरुआत की गई है। आज पहली पेपरलेस ई-कैबिनेट का आयोजन हुआ। इस पहल से कागज की बचत और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल सकेगी। pic.twitter.com/WOyrITpBwi
— Trivendra Singh Rawat (@tsrawatbjp) January 8, 2020
पहली ई-कैबिनेट के फैसले
8 जनवरी को हुई ई-कैबिनेट की पहली बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। गन्ने के समर्थन मूल्य को मंजूरी देने के साथ मानसरोवर यात्रा के लिए राज्य के लोगों को 25 हजार की जगह 50 हजार रुपये का अनुदान देने का फैसला किया गया है। गंगा गाय महिला डेयरी का लाभ कॉर्पोरेटिव के सभी सदस्यों को मिलेगा लेकिन महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। राजकीय महाविद्यालयों में खाली पड़े प्रवक्ता के पदों को एक साल के लिए अनुबंध के तहत भरने पर मुहर लगी। साथ ही प्रधानाचार्यों को पद भरने का अधिकार दिया गया। केदारनाथ धाम में आपदा के प्रभावितों के लिए राज्य सरकार भवन बनाएगी।


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