पर्यावरण के नायकों अनिल जोशी, कल्याण सिंह को पद्म सम्मान

पर्यावरण के नायकों अनिल जोशी, कल्याण सिंह को पद्म सम्मान

हिल मेल ब्यूरो, देहरादून देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्म पुरस्कार 2020 की घोषणा हो गई है। इस बार भी उत्तराखंड की 3 हस्तियों को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया जाएगा। जानेमाने पर्यावरणविद और समाजसेवी डॉ. अनिल जोशी

हिल मेल ब्यूरो, देहरादून

देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्म पुरस्कार 2020 की घोषणा हो गई है। इस बार भी उत्तराखंड की 3 हस्तियों को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया जाएगा। जानेमाने पर्यावरणविद और समाजसेवी डॉ. अनिल जोशी को पद्म भूषण, दून के बुजुर्ग चिकित्सक डॉ. योगी ऐरन को पद्मश्री और मैती पर्यावरण आंदोलन शुरू करने वाले कल्याण सिंह रावत को पद्मश्री देने की घोषणा हुई है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पद्म सम्मान पाने वाली राज्य की 3 विभूतियों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया है।

आपको बता दें कि पद्म पुरस्‍कार, तीन श्रेणियों -पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री वर्गों में प्रदान किए जाते हैं। ये पुरस्कार विषयों, गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामले, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल, प्रशासनिक सेवा आदि में प्रदान किए जाते हैं। ‘पद्म विभूषण’ असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए, ‘पद्म भूषण’ उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए और ‘पद्मश्री’ किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किए जाते हैं। इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है। इस साल 7 लोग पद्म विभूषण, 16 पद्म भूषण और 118 लोग पद्मश्री से सम्मानित किए जाएंगे।

पर्यावरणविद् अनिल जोशी को पद्म भूषण

अनिल प्रकाश जोशी एक जानेमाने पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने हिमालयन पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संस्थान (हैस्को) की स्थापना की है। डॉ. जोशी सकल पर्यावरण उत्पाद (जीईपी) को तवज्जो देने पर जोर दे रहे हैं। दरअसल, जीईपी एक ऐसी पहल है, जो संसाधनों की वृद्धि पर केंद्रित है। इसमें आर्थिकी की तर्ज पर पारिस्थितिकी संसाधनों का ब्योरा जुड़ा है। जीईपी के सिद्धांत के तहत ग्लेशियर, नदी और वन में सुधार का आकलन प्रदेश की आर्थिकी के हिसाब से होना चाहिए। जंगल, जल, हवा और मिट्टी को पैदा करने वाले पर्यावरण को भी उद्योग का दर्जा मिलना चाहिए। इससे पारिस्थितिकी में सुधार आएगा और हिमालय की आर्थिकी में नए आयाम जुड़ेंगे।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए साल 2006 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया था। उन्हें जमनालाल बजाज अवॉर्ड, अशोका फेलोशिप, द वीक मैन ऑफ द एयर और आईएससी जवाहर लाल नेहरू अवॉर्ड आदि से भी सम्मानित किया जा चुका है। अनिल जोशी का जन्म स्थान पौड़ी जनपद के कोटद्वार में हुआ था। स्नातकोत्तर की डिग्री वनस्पति विज्ञान में हासिल की और उन्होंने डाक्टरेट की उपाधि इकोलॉजी में ली। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1979 में कोटद्वार डिग्री कॉलेज में बतौर प्राध्यापक से की। इसके बाद हेस्को के नाम से एनजीओ बनाया। जोशी ने संस्था के माध्यम से पर्यावरण के संरक्षण और विकास के साथ कृषि क्षेत्र में शोध और अध्ययन किए।

गरीबों के डॉक्टर को मिला पद्मश्री सम्मान

धरती पर डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, जो लोगों की जान बचाते हैं। उत्तराखंड के एक डॉक्टर ऐसे हैं, जिन्हें लोग गरीबों के मसीहा डॉक्टर कहते हैं। जी हां, गरीबों, कमजोरों और असहाय लोगों के लिए वह देवदूत हैं। 82 साल के बुजुर्ग प्लास्टिक सर्जन डॉ. योगी ऐरन अब तक 5000 से अधिक प्लास्टिक सर्जरी फ्री में कर चुके हैं। उनके सेवाभाव का ही नतीजा है कि साल 2020 के पद्म पुरस्कारों की सूची में डॉ. ऐरन का भी नाम है। उनके सम्मान से उत्तराखंड का भी मान बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने बधाई देते हुए उन्हें उत्तराखंड का गौरव बताया है। आपको बता दें कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण लोग प्लास्टिक सर्जरी नहीं करा पाते थे इसे देखते हुए डॉ. ऐरन ने यह काम फ्री में करना शुरू कर दिया।

 

एक समय अमेरिका में प्लास्टिक सर्जन रहे डॉ. योगी पिछले 14 साल से मानवता की सेवा कर रहे हैं। वह कहते हैं कि जलने या जानवर के हमले में घायल होने के कारण शारीरिक विकृति से जूझ रहे लोगों को को दोबारा वही काया पाकर न सिर्फ नया जीवन, बल्कि सामान्य जीवन जीने का एक हौसला भी मिलता है। डॉ. योगी ऐरन ने 1967 में किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ से स्नातक किया। प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, पटना से 1971 में प्लास्टिक सर्जरी में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की। डॉ. योगी ने लखनऊ और देहरादून के सरकारी अस्पतालों और प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, पटना में काम किया।

मैती अभियान शुरू करने वाले का सम्मान

उत्तराखंड में मैती आंदोलन शुरू कर समाज को पर्यावरण बचाने का संदेश देने वाले कल्याण सिंह रावत को पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। आपको बता दें कि इस आंदोलन से प्रभावित व्यक्ति विवाह के बंधन में बंधते समय एक पौधा अवश्य रोपते हैं। इस तरह पांच लाख से अधिक विवाहित जोड़े अब तक मैती आंदोलन का हिस्सा बन चुके हैं। इसका श्रेय इस आंदोलन के प्रणेता जीव विज्ञान के रिटायर्ड प्रवक्ता कल्याण सिंह रावत को ही जाता है।

मूल रूप से चमोली जिले के कर्णप्रयाग ब्लॉक के रहने वाले कल्याण सिंह रावत ने मैती आंदोलन की शुरुआत चमोली के ग्वालदम कस्बे से 1995 में की थी। तब वह वहां जीव विज्ञान के शिक्षक थे। छात्र जीवन में चिपको आंदोलन से उन्हें पर्यावरण बचाने की सीख मिली।

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