हिल मेल ब्यूरो, देहरादून
दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र यानी सियाचिन में देश की सुरक्षा में तैनात टिहरी के हवलदार रमेश बहुगुणा का पार्थिव शरीर जब उनके पैृतक गांव साबली पहुंचा तो एक तरफ नारे लग रहे थे तो दूसरी तरफ लोगों के आंसू थम नहीं रहे थे। तिरंगे में लिपटे ताबूत को देख पूरा गांव बिलख पड़ा। परिजनों को सांत्वना देने आए लोग भी रोए जा रहे थे। सियाचिन में तैनात महार रेजिमेंट के हवलदार रमेश बहुगुणा (38) को भीषण ठंड लगने और ऑक्सीजन की कमी से तबीयत बिगड़ गई थी। उन्होंने सोमवार रात चंडीगढ़ सेना के अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली।
सेना के जवान मंगलवार देर रात हवलदार रमेश बहुगुणा का शव लेकर उनके गांव पहुंचे। रमेश का शव देख मां और पत्नी बेसुध हो गईं। बुधवार को दिनभर लोग परिजनों को ढाढस बंधाने के लिए पहुंचते रहे। बताया गया है कि ज्यादा ठंड के कारण रमेश के ब्रेन में खून का थक्का जम गया था। चंडीगढ़ अस्पताल में डॉक्टरों ने आपरेशन किया, लेकिन रमेश को बचाया नहीं जा सका। सेना के अधिकारियों ने परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।
सियाचिन में तैनात टिहरी जिले के साबली गांव निवासी 38 वर्षीय हवलदार रमेश बहुगुणा( महार रेजीमेंट) की देश के लिए शहादत को नमन करता हूँ। शोक संतप्त परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनायें हैं और भरोसा दिलाता हूँ कि सरकार शहीदों के परिजनों के साथ हर समय खड़ी रहेगी।ॐ शांति। pic.twitter.com/LLJdouQ8pP
— Trivendra Singh Rawat (@tsrawatbjp) February 5, 2020
रमेश के छोटे मासूम बच्चे हैं। बेटी 4 साल की और बेटा 6 साल का है। वे अपने पापा के बारे में जब मां से पूछते तो लोगों का कलेजा मुंह को आ जाता। बाद में हवलदार रमेश बहुगुणा के पार्थिव शरीर का सैन्य सम्मान के साथ ऋषिकेश के पूर्णानंद घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के पार्थिव शरीर को उनके बड़े भाई दिनेश और बेटे अभिनव ने मुखाग्नि दी। महार रेजिमेंट के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
उधर, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट कर शहीद को नमन किया है। उन्होंने लिखा, ‘सियाचिन में तैनात टिहरी जिले के साबली गांव निवासी 38 वर्षीय हवलदार रमेश बहुगुणा (महार रेजीमेंट) की देश के लिए शहादत को नमन करता हूं। शोक संतप्त परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं और भरोसा दिलाता हूं कि सरकार शहीदों के परिजनों के साथ हर समय खड़ी रहेगी। ॐ शांति।’



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