Friday , 4 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन पर कितना काम, रेल मंत्री ने बताया
उत्तराखंड न्यूज़

ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन पर कितना काम, रेल मंत्री ने बताया

फाइल फोटो
फाइल फोटो

हिल मेल ब्यूरो, देहरादून

उत्तराखंड के लोग ऋषिकेश कर्णप्रयाग नई रेल लाइन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बुधवार को उन्होंने बताया कि साल 2010-11 के बजट में स्वीकृत परियोजना की नई लागत 16216 करोड़ रुपये है। इसमें से मार्च 2019 तक 1361 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

परियोजना के तहत सर्वेक्षण, भूमि अधिग्रहण, वन विभाग की स्वीकृति, भूतकनीकी जांच और पहुंच मार्गों का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। नैनीताल के सांसद अजय भट्ट के पूछे गए प्रश्न के जवाब में गोयल ने बताया कि परियोजना के तहत 6 सुरंगों के निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। इन सुरंगों में आने-जाने के छह मार्गों को भी बनाया जा रहा है।

दरअसल, परियोजना के तहत बनाई जाने वाली 16 सुरंगों के निर्माण कार्य को 10 पैकेज में बांटा गया है। इनमें 6 सुरंगों का निर्माण कार्य शुरू है। डिजाइन एवं परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता ठेके दे दिए गए हैं। सभी पैकेजों में डिजाइन कार्य शुरू हो चुके हैं।

उधर, वीरभद्र और योगनगरी ऋषिकेश (5.7 किमी) के बीच पहले ब्लाक खंड में निर्माण कार्य शुरू हो चुके हैं। ऋषिकेश में एक निचला सड़क पुल और एक ऊपरी सड़क पुल पूरा हो गया है। ऋषिकेश के पास चंद्रभागा नदी पर ऊपरी रेल पुल बनाने का काम शुरू किया गया है। लछमौली में और श्रीनगर में अलकनंदा नदी पर रेल पुल बन रहा है। अलकनंदा नदी पर पर ही श्रीनगर, गौछार और कालेश्वर में भी तीन सड़क पुलों का भी निर्माण हो रहा है।

हालांकि रेल मंत्री ने यह भी साफ कहा है कि ऋषिकेश कर्णप्रयाग परियोजना को पूरा करने के लिए अभी कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कई ऐसे कारक है जिसे समय और लागत प्रभावित होती है।

रेल मंत्री ने यह भी बताया कि 155 किमी लंबी टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के सर्वेक्षण का कार्य शुरू हो गया है। इससे पूर्व 2010-11 में इस रेल लाइन का सर्वेक्षण हुआ था, जिसमें इसकी लागत 2791 करोड़ रुपये थी।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...