उत्तराखंड के लिए जीवन रेखा मानी जाने वाली चारधाम यात्रा की शुरुआत ऋषिकेश से 24 अप्रैल को शुरू हुई। राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने हरी झंडी दिखाकर यात्रा का शुभारंभ किया। इस दौरान लाखों की संख्या में आने वाले श्रृद्धालुओं के स्वागत के लिए
उत्तराखंड के लिए जीवन रेखा मानी जाने वाली चारधाम यात्रा की शुरुआत ऋषिकेश से 24 अप्रैल को शुरू हुई। राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने हरी झंडी दिखाकर यात्रा का शुभारंभ किया। इस दौरान लाखों की संख्या में आने वाले श्रृद्धालुओं के स्वागत के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की गई थी। इसी दिन अक्षय तृतीया के अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ खोल दिये गये। गंगोत्री में सेना के जवानों और देश-विदेश से आये भक्तों ने मां गंगा की डोली का भव्य स्वागत किया। पहले दिन हजारों भक्तों ने मां गंगा के दर्शन किये। पहले दिन हजारों श्रृद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
इन दोनों धामों के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा शुरू हो गई है। भैरव मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद मां गंगा की डोली 24 अप्रैल को प्रातः दस बजे ढोल दमाऊं के साथ जैसे ही गंगोत्री धाम के प्रवेश द्वार पर पहुंची। वहां मौजूद महार रेजीमेंट के जवानों ने बैंड बाजों और मसक की धुन पर डोली का स्वागत किया।
गंगोत्री पहुंचे हजारों श्रृद्धालुओं ने मां गंगा की डोली का प्रवेश द्वार पर स्वागत किया और मां गंगा के जयकारे के साथ मंदिर तक पहुंचे। विद्वान पंडितों ने करीब एक घंटे तक वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना की। शुभ मुहूर्त पर 11ः30 बजे धाम के कपाट खोलकर डोली ने मंदिर में प्रवेश किया। इसके बाद गंगा की अखंड ज्योति के प्रज्ज्वलित होने पर कपाट श्रृद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गये।
दूसरी ओर मां यमुना की उत्सव डोली प्रातः शीतकालीन प्रवास खरसाली गांव से शनिदेव की अगुवाई में ढोल दमाऊं के साथ यमुनोत्री धाम पहुंची। डोली के धाम पहुंचने पर देश-विदेश के श्रृद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। विधि-विधान से मां यमुना की पूजा-अर्चना होने पर प्रतिमा को मंदिर में प्रतिष्ठित कराया गया। इसके बाद धाम के कपाट अखंड ज्योति के साथ पूर्वाह्न 11ः15 बजे श्रृद्धालुओं के लिए खोल दिये गये। कपाट खुलने पर हजारों श्रृद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन कर पुण्य कमाया।
राज्य में चार धाम या
त्रा का मुख्य द्वार ऋषिकेश ही है। यहीं से इस यात्रा के लिए दुर्गम पहाड़ों की चढ़ाई शुरू होती है। चार धाम के लिए केदारनाथ के लिए 14 किलोमीटर तथा यमुनोत्री के लिए पांच किलोमीटर की पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। वहीं गंगोत्री और बद्रीनाथ तक के लिए मोटर मार्ग की सुविधा पहले से ही है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद भट्ट ने विशेष बातचीत में बताया कि चारों धाम के मंदिरों में यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट कल से ग्रीष्मकाल के लिए खुल जाएंगे। दोनों मंदिरों के परिसरों को बेहद खूबसूरती से माला फूलों तथा बिजली के झालरों से सजाया गया था।







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